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135 साल पुरानी लाइब्रेरी, 8.5 लाख किताबें – और नए Central Vista प्लान में कोई जगह नहीं
दिल्ली की 135 साल पुरानी Central Secretariat Library (CSL) Central Vista पुनर्विकास के बीच अपने नए ठिकाने को लेकर अनिश्चितता में है। शास्त्री भवन खाली कराया जा रहा है, लेकिन लाइब्रेरी के विशाल संग्रह के लिए प्रस्तावित 300 वर्ग मीटर की जगह को संस्कृति मंत्रालय ने अपर्याप्त बताया है।

नई दिल्ली: भारत सरकार की सबसे पुरानी और बड़ी सरकारी लाइब्रेरियों में शामिल Central Secretariat Library (CSL) के सामने नए ठिकाने का संकट खड़ा हो गया है। 1891 में Imperial Secretariat Library के रूप में शुरू हुई CSL फिलहाल शास्त्री भवन के G-Wing में संचालित होती है और 1969 से यहीं स्थित है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इसके संग्रह में करीब 8.5 लाख प्रिंट और नॉन-प्रिंट दस्तावेज हैं। इनमें किताबों के अलावा सरकारी रिपोर्ट, प्रकाशन और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री शामिल है।
Central Vista पुनर्विकास के तहत शास्त्री भवन को खाली कराया जा रहा है। CPWD ने 17 सितंबर को वहां मौजूद मंत्रालयों और विभागों को परिसर खाली करने के निर्देश दिए थे और इसे सितंबर 2026 के अंत तक निर्माण कार्य के लिए सौंपे जाने की बात कही थी। ऐसे में CSL को भी मौजूदा परिसर से स्थानांतरित करना जरूरी हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 में Directorate of Estates ने Kartavya Bhavan-2 में CSL के लिए करीब 300 वर्ग मीटर की जगह वाले दो कमरे आवंटित किए थे। संस्कृति मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए स्वीकार नहीं किया कि इतनी जगह लाइब्रेरी के विशाल संग्रह और आवश्यक सुविधाओं के लिए पर्याप्त नहीं है। मंत्रालय ने 2023 में भी नए Central Vista परिसर में CSL को शास्त्री भवन में उपलब्ध लगभग समान क्षेत्रफल, करीब 5,466 वर्ग मीटर, देने का अनुरोध किया था।
CSL का इतिहास भी महत्वपूर्ण है। इसकी शुरुआत 1891 में कोलकाता में हुई थी और राजधानी दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद यह भी दिल्ली आ गई। आधिकारिक वेबसाइट इसे National Library, Kolkata के बाद संग्रह के आकार के लिहाज से दूसरी सबसे बड़ी Central Government library बताती है।
फिलहाल मुख्य सवाल यह है कि शास्त्री भवन खाली होने के बाद CSL के विशाल संग्रह और शोध सुविधाओं को कहां स्थान दिया जाएगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस संबंध में अभी पर्याप्त जगह को लेकर अंतिम समाधान सामने नहीं आया है।
