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पालघर में सूर्या डैम जमीन मामला: पुराने रिकॉर्ड खुलेंगे! 7/12 और कब्जे की होगी जांच
पालघर: महाराष्ट्र सरकार ने सूर्या डैम परियोजना से प्रभावित लोगों से जुड़े करीब 1,970 पुराने जमीन आवंटन आदेशों की समीक्षा करने का फैसला किया है। जांच में पुराने आवंटन आदेश, जमीन पर वास्तविक कब्जा और 7/12 उतारे में दर्ज जानकारी की पड़ताल की जाएगी। पात्र लाभार्थियों के अधिकार बनाए रखने और रिकॉर्ड में जरूरी सुधार की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा। वहीं, विवादित और नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों की अलग से जांच होगी।

पालघर: सूर्या डैम परियोजना से प्रभावित लोगों से जुड़े पुराने जमीन आवंटन मामलों को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य मंत्रिमंडल ने पालघर जिले में सूर्या डैम परियोजना से संबंधित करीब 1,970 जमीन आवंटन आदेशों की समीक्षा करने को मंजूरी दी है। इस प्रक्रिया में पुराने आवंटन आदेश, जमीन पर वास्तविक कब्जा और 7/12 उतारे में दर्ज जानकारी की जांच की जाएगी।
1970 में किए गए थे जमीन के आवंटन
रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित जमीन का आवंटन वर्ष 1970 में किया गया था। इसमें भूमिहीन लोगों, कृषि मजदूरों और स्वतंत्रता सेनानियों सहित विभिन्न लाभार्थियों को जमीन आवंटित की गई थी।
हालांकि, कुछ मामलों में जमीन पर लाभार्थियों का वास्तविक कब्जा होने के बावजूद उनके नाम या आवंटन की जानकारी 7/12 रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज नहीं हो पाई। इसी तरह के पुराने मामलों को अब दोबारा जांचने का निर्णय लिया गया है।
वास्तविक कब्जे वाले लाभार्थियों को मिल सकता है अधिकार
सरकार की समीक्षा में यह देखा जाएगा कि पुराने आवंटन आदेश के आधार पर संबंधित व्यक्ति आज भी जमीन पर वास्तविक रूप से कब्जे में है या नहीं। यदि जांच में यह पाया जाता है कि लाभार्थी वास्तव में आवंटित जमीन पर कब्जे में है और उसका दावा नियमों के अनुरूप है, तो उसके जमीन संबंधी अधिकारों को बनाए रखने और रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
किन मामलों में जमीन वापस ली जा सकती है?
जिन मामलों में आवंटन की शर्तों का उल्लंघन हुआ है और लाभार्थी का जमीन पर वास्तविक कब्जा भी नहीं है, उन मामलों की अलग से जांच की जाएगी। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। जांच के बाद यदि आवंटन नियमों के अनुरूप नहीं पाया जाता है, तो जमीन को सरकारी जमीन के रूप में वापस लेने की कार्रवाई की जा सकती है।
7/12 रिकॉर्ड में नाम नहीं होने पर भी होगी जांच
इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू उन लोगों से जुड़ा है जो जमीन पर खेती कर रहे हैं, लेकिन उनके पास औपचारिक आवंटन आदेश उपलब्ध नहीं है या उनका नाम 7/12 उतारे में दर्ज नहीं है। ऐसे मामलों में जमीन पर वास्तविक खेती और कब्जे से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों और सबूतों की जांच की जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ विशेष मामलों में प्रति परिवार अधिकतम 2 एकड़ तक कृषि अतिक्रमण को नियमित करने के प्रावधान पर भी विचार किया जा सकता है, निर्धारित शर्तों के अधीन।
जमीन मालिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
सूर्या डैम परियोजना से जुड़े पुराने जमीन मामलों में लंबे समय से आवंटन आदेश, वास्तविक कब्जे और 7/12 रिकॉर्ड के बीच अंतर की समस्या सामने आती रही है। सरकार की यह समीक्षा ऐसे मामलों में पुराने रिकॉर्ड को दोबारा जांचने और पात्र लाभार्थियों के जमीन संबंधी अधिकारों को स्पष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। हालांकि, प्रत्येक मामले का निर्णय संबंधित रिकॉर्ड, कब्जे की स्थिति और लागू नियमों के आधार पर अलग-अलग किया जाएगा। इसलिए केवल 7/12 में नाम होने या जमीन पर कब्जा होने से हर मामले में स्वतः मालिकाना हक तय नहीं माना जा सकता।
