उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच सियासी गणित तेज हो गया है। इस चुनाव में सबसे ज्यादा नजर उस अतिरिक्त सीट पर है, जिसके लिए दोनों खेमों को अपने तय वोटों के अलावा दूसरे विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। इसी वजह से सहयोगी दलों और अलग रुख रखने वाले विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। मौजूदा संख्या बल के मुताबिक बीजेपी अपने गठबंधन के समर्थन से कई सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर सकती है। वहीं समाजवादी पार्टी भी अपने दो उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति में है। इसके बाद बचने वाले अतिरिक्त वोटों को लेकर दोनों दलों के बीच मुकाबला है। एक तरफ बीजेपी अतिरिक्त सीट के लिए जरूरी वोट जुटाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर सपा भी अपने गठबंधन के बाहर से समर्थन हासिल करने के विकल्प तलाश रही है।
इस चुनाव में 2024 का राज्यसभा चुनाव भी चर्चा में है। उस समय बीजेपी ने अपने सात उम्मीदवारों के अलावा संजय सेठ को आठवें उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा था। मतदान के दौरान सपा के कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग हुई थी। इसके चलते संजय सेठ चुनाव जीत गए थे, जबकि सपा के तीसरे उम्मीदवार आलोक रंजन को हार का सामना करना पड़ा था। इसी वजह से इस बार भी 2024 के घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। अखिलेश यादव ने राज्यसभा चुनाव में ‘सरप्राइज’ देने की बात कही थी। इसके बाद सपा की ओर से अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने की संभावना को लेकर चर्चा शुरू हुई। हालांकि, तीसरी सीट के लिए पार्टी को अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। सपा की नजर अपने सहयोगी दलों के उन विधायकों पर भी है, जिनका रुख मतदान के दौरान महत्वपूर्ण हो सकता है।
दूसरी ओर बीजेपी भी अपने गठबंधन को मजबूत रखने के साथ-साथ अतिरिक्त वोट जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी के लिए चुनौती यह होगी कि सहयोगी दलों के विधायक एकजुट रहें और अतिरिक्त सीट के लिए जरूरी संख्या पूरी हो। वहीं सपा के सामने भी अपने विधायकों और सहयोगियों को एक साथ रखने की चुनौती है। राज्यसभा चुनाव में मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग की संभावना को लेकर भी दोनों दल सतर्क हैं। ऐसे में उम्मीदवारों के चयन से लेकर नामांकन, सहयोगी दलों के रुख और मतदान के दिन विधायकों के समर्थन तक हर कदम महत्वपूर्ण होगा। अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यह मुकाबला दोनों दलों के लिए राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।