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बॉम्बे हाईकोर्ट ने नारायण राणे का लोकसभा चुनाव बरकरार रखा, विनायक राउत की याचिका खारिज
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीजेपी नेता नारायण राणे के 2024 लोकसभा चुनाव को चुनौती देने वाली विनायक राउत की चुनाव याचिका खारिज कर दी। जस्टिस शैलेश ब्रह्मे ने कहा कि कथित भ्रष्ट आचरण से जुड़े आरोपों में जरूरी तथ्य और स्पष्ट विवरण नहीं दिए गए थे। कोर्ट ने राणे के निर्वाचन को बरकरार रखा।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद नारायण राणे के 2024 लोकसभा चुनाव को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका खारिज कर दी है। शिवसेना (UBT) नेता विनायक राउत ने रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग लोकसभा सीट से राणे के निर्वाचन को चुनौती देते हुए कथित भ्रष्ट आचरण और चुनाव नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए थे। जस्टिस शैलेश ब्रह्मे की कोल्हापुर पीठ ने 29 सितंबर 2026 को याचिका खारिज करते हुए कहा कि चुनाव याचिका में भ्रष्ट आचरण के आरोपों से जुड़े आवश्यक तथ्यों और विवरणों को कानून के मुताबिक पर्याप्त रूप से पेश नहीं किया गया था।
2024 में राणे ने राउत को हराया था
2024 के लोकसभा चुनाव में रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग सीट से नारायण राणे को 4,48,514 वोट मिले थे, जबकि विनायक राउत को 4,00,656 वोट मिले। राणे ने 47,858 वोटों के अंतर से चुनाव जीता था। इसके बाद राउत ने चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। राउत की ओर से अधिवक्ता असीम सरोदे ने चुनाव याचिका दायर की थी। याचिका में राणे, उनके समर्थकों और विशेष रूप से उनके बेटे नितेश राणे के चुनाव प्रचार से जुड़े कुछ कथित कृत्यों को आधार बनाया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि चुनाव प्रचार की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी प्रचार किया गया और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर उपहार बांटे गए।
नितेश राणे के भाषण का भी किया गया था जिक्र
याचिका में नितेश राणे के एक भाषण का उल्लेख किया गया था। राउत का आरोप था कि 7 मई 2024 को मतदान होने से पहले चुनाव आचार संहिता और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए प्रचार जारी रखा गया। याचिका में आरोप लगाया गया कि नितेश राणे ने सरपंचों के एक समूह को संबोधित करते हुए राणे के पक्ष में वोट जुटाने की अपील की और कथित तौर पर वोट नहीं दिलाने पर फंड रोकने की बात कही। राउत ने यह भी आरोप लगाया था कि राणे और उनके समर्थकों की ओर से मतदाताओं को कथित रूप से ‘उपहार’ देकर प्रभावित करने का प्रयास किया गया। इन आरोपों को चुनाव में कथित ‘corrupt practice’ के तौर पर पेश किया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा- आरोपों में जरूरी विवरण नहीं
नारायण राणे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश मानेशिंदे ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कथित भ्रष्ट आचरण के संबंध में आवश्यक material facts और particulars नहीं दिए गए हैं। उन्होंने Representation of the People Act, 1951 की धारा 83(1)(a) और (b) का हवाला देते हुए याचिका खारिज करने की मांग की।
राणे की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि याचिका में cause of action पर्याप्त रूप से सामने नहीं आता और बाद में दाखिल हलफनामा भी निर्धारित Form 25 के अनुरूप नहीं था। इसके अलावा याचिका के verification में भी कानूनी कमी होने का दावा किया गया।
प्रचार के आरोप पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
जस्टिस शैलेश ब्रह्मे ने याचिका के संबंधित हिस्से की जांच करते हुए कहा कि 6 मई 2024 को कथित चुनाव प्रचार के संबंध में आरोप बहुत अस्पष्ट हैं। कोर्ट के मुताबिक इसमें प्रचार का सटीक समय, स्थान और प्रचार करने वाले व्यक्तियों की पहचान जैसे आवश्यक material particulars स्पष्ट रूप से नहीं दिए गए थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल समाचार रिपोर्टों के आधार पर इन आरोपों को सटीक रूप से साबित करने के लिए जरूरी विवरण उपलब्ध नहीं होते। इसी तरह 16 मई 2024 की शिकायत से जुड़े दूसरे आरोप में भी व्यक्ति, रकम, समय और स्थान जैसी महत्वपूर्ण जानकारी पर्याप्त रूप से नहीं दी गई थी।
राउत की ओर से क्या दलील दी गई?
विनायक राउत की ओर से अधिवक्ता असीम सरोदे ने दलील दी कि चुनाव में कथित भ्रष्ट आचरण और अनुचित प्रभाव के पर्याप्त आधार मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि याचिका में दिए गए आरोपों को अखबारों में प्रकाशित खबरों, वीडियो क्लिप और अन्य दस्तावेजों के साथ पढ़ा जाना चाहिए। राउत की ओर से यह भी कहा गया कि मामले को केवल प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए और कथित भ्रष्ट आचरण से जुड़े साक्ष्यों की जांच के लिए पूर्ण सुनवाई की आवश्यकता है।
धारा 83 के तहत याचिका में क्या जरूरी है?
हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव याचिका में ऐसे material facts का संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट विवरण होना चाहिए, जिनके आधार पर चुनाव को चुनौती देने का कानूनी आधार बनता हो। यदि याचिका में आवश्यक तथ्यों का अभाव है, तो वह Representation of the People Act की धारा 83 की अनिवार्य आवश्यकताओं का पालन नहीं करती। कोर्ट ने माना कि इस मामले में धारा 83(1)(a) का पालन नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी कमी महत्वपूर्ण और मूलभूत है तथा बाद में दाखिल दस्तावेजों या संशोधन के जरिए इसे ठीक नहीं किया जा सकता। इसलिए विनायक राउत की चुनाव याचिका खारिज कर दी गई और नारायण राणे का 2024 लोकसभा चुनाव बरकरार रहा।
