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SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, गैर-SIR राज्यों में Form-6 से Annexure-D हटाया

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने गैर-SIR राज्यों में Form-6 का मूल प्रारूप बहाल कर दिया है। अब इन राज्यों में नया मतदाता पंजीकरण कराने के लिए Form-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र यानी Annexure-D देना जरूरी नहीं होगा। चुनाव आयोग के अनुसार, SIR वाले राज्यों में यह अतिरिक्त घोषणा पत्र प्रक्रिया के दौरान लागू रहेगा, जबकि जहां SIR पूरा हो चुका है वहां Form-6 पुराने स्वरूप में ऑनलाइन और ऑफलाइन भरा जा सकेगा।

Kashish Rai01 अक्टू. 2026, 07:04 PM IST
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SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, गैर-SIR राज्यों में Form-6 से Annexure-D हटाया

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने Form-6 को लेकर बड़ा बदलाव किया है। आयोग ने उन राज्यों में ऑनलाइन Form-6 से अतिरिक्त घोषणा पत्र Annexure-D हटा दिया है, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यह बदलाव 30 सितंबर 2026 से ECINET सिस्टम में लागू किया गया है। इस फैसले के बाद गैर-SIR राज्यों में नए मतदाता पंजीकरण के लिए मूल Form-6 ही इस्तेमाल किया जाएगा। यानी आवेदक को Form-6 के साथ अलग से Annexure-D भरने की जरूरत नहीं होगी। चुनाव आयोग की मतदाता सेवा व्यवस्था में Form-6 नए मतदाता के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है।


दरअसल, SIR प्रक्रिया के दौरान Form-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ा गया था। इसमें आवेदकों से उनके परिवार के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही थी। SIR के दौरान पुराने मतदाता रिकॉर्ड में आवेदक, उसके माता-पिता या दादा-दादी की जानकारी से संबंधित विवरण महत्वपूर्ण हो गया था। इसके कारण नए मतदाताओं के लिए Form-6 की प्रक्रिया पहले की तुलना में अलग हो गई थी। SIR के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे Form-6 में आवेदक को पिछली मतदाता सूची से संबंधित परिवार की जानकारी देने के साथ विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र और क्रम संख्या जैसी जानकारी भी उपलब्ध करानी पड़ रही थी। इसके विपरीत मूल Form-6 में नए मतदाता से इस तरह की पुरानी पारिवारिक मतदाता सूची की जानकारी अलग से देने की व्यवस्था नहीं थी।


इस बदलाव का असर खास तौर पर पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं पर पड़ने की चर्चा रही है। 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले नए मतदाताओं के पास पुराने SIR रिकॉर्ड में अपना नाम या परिवार का विवरण उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अतिरिक्त जानकारी जुटाने की समस्या सामने आ सकती थी। अब जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां मूल Form-6 बहाल होने से ऐसी अतिरिक्त घोषणा की आवश्यकता नहीं रहेगी। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया ECINET और चुनाव आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल से जुड़ी हुई है। चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर नए मतदाता पंजीकरण के लिए Form-6 उपलब्ध है।

SIR को लेकर विवाद क्या था?

विवाद मुख्य रूप से इस बात को लेकर था कि वैधानिक Form-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र को किस आधार पर अनिवार्य किया जा सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी आयोग का हिस्सा हैं। रिपोर्टों में उनके नाम से यह दावा किया गया है कि वैधानिक Form-6 में बदलाव का अधिकार नियमों के तहत सीमित है और केवल ऑनलाइन पोर्टल पर अतिरिक्त घोषणा को अनिवार्य बनाने को लेकर सवाल उठे थे। हालांकि, इस आंतरिक मतभेद के विशिष्ट विवरण की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली है, इसलिए इसे रिपोर्टेड दावा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


चुनाव आयोग की ओर से SIR को मतदाता सूची को अपडेट करने और उसकी शुद्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया के रूप में संचालित किया जा रहा है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026 के SIR से संबंधित जानकारी और मतदाता सेवाएं उपलब्ध हैं।

अब आयोग के ताजा फैसले के बाद जहां SIR पूरा हो चुका है, वहां Form-6 अपने मूल स्वरूप में उपलब्ध रहेगा, जबकि जिन राज्यों में SIR अभी चल रहा है, वहां संबंधित SIR प्रक्रिया के तहत अतिरिक्त घोषणा पत्र की व्यवस्था लागू रह सकती है। 2026 की आधिकारिक SIR समय-सारणी में अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग चरण और अंतिम मतदाता सूची की तारीखें निर्धारित की गई हैं। इस फैसले से नए मतदाताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया और Form-6 की आवश्यकताओं को लेकर स्थिति पहले की तुलना में स्पष्ट हुई है।