general
मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद की सुनवाई फिर टली, 6 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। अलग-अलग हिंदू याचिकाकर्ताओं के बीच ‘श्री कृष्ण विराजमान’ की ओर से अदालत में प्रतिनिधित्व करने को लेकर सहमति नहीं बन पाई। इस पर कोर्ट ने कहा कि अब सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से सुननी होंगी और अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी। कोर्ट ने बार-बार सुनवाई टलने पर भी टिप्पणी की।

मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई एक बार फिर टल गई है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षों के बीच आपसी सहमति नहीं बन पाने के कारण मामले को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर 2026 को करेगा। मामले में अलग-अलग हिंदू याचिकाकर्ताओं और पक्षों के बीच इस बात पर सहमति नहीं बन सकी कि अदालत में ‘श्री कृष्ण विराजमान’ का प्रतिनिधित्व कौन करेगा। कोर्ट को पहले बताया गया था कि सभी सह-वादी आपस में चर्चा कर किसी एक व्यवस्था पर सहमत हो जाएंगे, लेकिन सुनवाई के दौरान ऐसी सहमति सामने नहीं आई।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि सभी पक्ष एक ही ओर हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में मामले को इसी तरह आगे बढ़ाना संभव नहीं हो पा रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पक्षों के बीच आपसी सहमति नहीं बनती है, तो अदालत को मामले से जुड़े सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से सुननी होंगी। अदालत ने लगातार सुनवाई टलने पर भी चिंता जताई और टिप्पणी की कि मामला बार-बार अगली तारीख पर जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट अब मामले को गुण-दोष के आधार पर सुनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। हालांकि बुधवार को समय की कमी के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो सकी और अदालत ने अगली तारीख 6 नवंबर तय कर दी।
यह विवाद मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर और शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है। इस मामले में हिंदू पक्ष की ओर से भगवान श्री कृष्ण विराजमान और अन्य पक्षकारों से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में भी Committee of Management Trust Shahi Masjid Idgah बनाम Bhagwan Shrikrishna Virajman & Ors. से संबंधित मामले दर्ज हैं। अब 6 नवंबर को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट सभी संबंधित पक्षों की विस्तृत कानूनी दलीलें सुनेगा। इस सुनवाई में यह भी महत्वपूर्ण रहेगा कि अलग-अलग याचिकाकर्ताओं के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर सहमति बनती है या अदालत स्वयं सभी पक्षों की दलीलें सुनकर मामले को आगे बढ़ाती है।
