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फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश और 14% ब्याज, FIR में दर्ज बयानों से सामने आई कहानी
FIR में दर्ज बयानों के अनुसार, निवेश की रकम, फिक्स्ड डिपॉजिट और 14 प्रतिशत सालाना ब्याज से जुड़े लेन-देन का उल्लेख है। दस्तावेज में विभिन्न कंपनियों, संबंधित व्यक्तियों और निवेश के माध्यम से रिटर्न दिए जाने से जुड़ी जानकारी दर्ज की गई है।

ठाणे/रायगढ़: उपलब्ध FIR में दर्ज बयान के अनुसार, एक निवेशक ने 26 नवंबर 2019 को निवेश किए जाने और उसके संबंध में एग्रीमेंट मिलने की जानकारी दी है। बयान में बताया गया है कि संबंधित निवेश पर फरवरी 2021 तक लगभग 8.90 लाख रुपये ब्याज के रूप में प्राप्त हुए थे।
FIR में दर्ज जानकारी के मुताबिक, मार्च 2021 के आसपास निवेशक को एक क्रेडिट सोसायटी के कार्यालय से फोन आया। कथित तौर पर बताया गया कि कंटम मैनेजमेंट पार्टनर कंपनी में लगी निवेश राशि को संबंधित क्रेडिट सोसायटी में 3 या 6 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने पर सालाना 14 प्रतिशत ब्याज दिया जाएगा। बयान के अनुसार, ब्याज की राशि हर महीने देने और अवधि पूरी होने पर मूलधन बैंक खाते में जमा करने की बात कही गई थी।
निवेश को लेकर आगे बढ़ी जानकारी
दस्तावेज में दर्ज बयान के अनुसार, इस प्रस्ताव के संबंध में निवेशक ने अमोल परांजपे से भी संपर्क किया। बयान में कहा गया है कि परांजपे ने कथित तौर पर बताया कि कंटम मैनेजमेंट पार्टनर कंपनी की ओर से आगे रिटर्न देना संभव नहीं होगा।
FIR में यह भी उल्लेख है कि बाद में निवेश से संबंधित जानकारी लेने के दौरान महेश भोईर से संपर्क किया गया। दस्तावेज के अनुसार, भोईर ने बताया कि पहले फिनलिस कैपिटल मार्केट के माध्यम से निवेश स्वीकार करना बंद कर दिया गया है और आगे निवेश फिनलिस इंटरप्राइजेज एडवाइजर के माध्यम से लिया जाएगा।
कंपनी और संबंधित लोगों का उल्लेख
FIR में दर्ज बयान के अनुसार, महेश भोईर ने खुद को फिनलिस इंटरप्राइजेज एडवाइजर का मालिक बताया, जबकि कांताराज बी को कंपनी का पार्टनर बताया गया। दस्तावेज में महेश भोईर से संबंधित अन्य व्यक्तियों और कंपनी में उनकी भूमिकाओं का भी उल्लेख किया गया है।
एक अन्य बयान में सिनर्जी इन्वेस्टमेंट एडवाइजर LLP का भी उल्लेख है। दस्तावेज के अनुसार, अक्टूबर 2016 में संबंधित व्यक्तियों ने ठाणे के डोंबिवली पूर्व स्थित कंपनी कार्यालय का दौरा किया था। वहां महेश भोईर से मुलाकात हुई और उन्होंने कंपनी से जुड़े कुछ अन्य लोगों से परिचय कराया। FIR में दर्ज जानकारी के अनुसार, महेश भोईर ने उस कंपनी में अपनी भूमिका मालिक के रूप में बताई थी, जबकि परेश गोविंद वेलनकर और तुषार गोविंदा फिर्के को पार्टनर बताया गया। दस्तावेज में अनघा भोईर के कंपनी में काम करने का भी उल्लेख है।
पुराने कर्मचारी और लेन-देन का संदर्भ
दस्तावेज में दर्ज एक अन्य बयान के अनुसार, एक व्यक्ति ने बताया कि वह वर्ष 2016 तक एक कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत था और मई 2016 में उसने नौकरी से इस्तीफा दिया था। उसके अनुसार, कंपनी से उसे प्रोविडेंट फंड और अन्य जमा रकम प्राप्त हुई थी। इसी दौरान उसकी पहचान अमोल परांजपे और गौतम अरुण कर्णिक से हुई थी।
FIR में दर्ज बयानों में निवेश, कंपनियों के माध्यम से रकम लगाने और ब्याज/रिटर्न से संबंधित कई लेन-देन का उल्लेख है। मामले में दर्ज आरोपों और बयानों की वास्तविक कानूनी स्थिति का निर्धारण संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
