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उद्धव ने CEC ज्ञानेश कुमार को बताया BJP का ‘हथियार’ SIR के खिलाफ एक मंच पर आए ठाकरे बंधु
महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में मुंबई में विपक्ष ने ‘विराट गर्जना मोर्चा’ निकाला। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में निकले मार्च में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए गए। राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में SIR रद्द करने और भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की।

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर रविवार को मुंबई में विपक्ष ने विरोध मार्च निकाला। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने ‘विराट गर्जना मोर्चा’ का नेतृत्व किया। मार्च दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू होकर BMC मुख्यालय तक पहुंचा। प्रदर्शन में SIR को लेकर कथित गड़बड़ियों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी नारे लगाए और उन्हें हटाने या इस्तीफे की मांग की। मार्च में किसी राजनीतिक दल के झंडे की अनुमति नहीं थी और लोगों से केवल तिरंगा लेकर शामिल होने की अपील की गई थी।
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में बीजेपी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने SIR के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का आरोप लगाया और ज्ञानेश कुमार को बीजेपी का ‘हथियार’ बताया। उद्धव ने कहा कि अब ‘इंडिया अगेंस्ट वोट चोरी’ नया नारा है। उन्होंने SIR के पीछे बांग्लादेशी नागरिकों के नाम हटाने के तर्क पर भी सवाल उठाए। वहीं, राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में SIR को रद्द करने की मांग की। उन्होंने भविष्य में देश में चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बजाय बैलेट पेपर से कराने की मांग भी रखी।
मार्च में कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट और विजय वडेट्टीवार के अलावा NCP (SP) के जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे, जितेंद्र आव्हाड और अनिल देशमुख भी शामिल हुए। बालासाहेब थोराट ने चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों का भी जिक्र किया। शिवसेना (UBT) नेता सुषमा अंधारे ने भी चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बीजेपी की ‘कठपुतली’ बन गया है और SIR से जुड़े फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर सवाल उठाए। हालांकि, इन नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं और संबंधित मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच या आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
