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उल्हासनगर में महायुति का महासंग्राम: हाई कोर्ट की रोक से लेकर FIR तक, भाजपा-शिवसेना में बढ़ी तनातनी
उल्हासनगर में मनोनीत नगरसेवकों के चयन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब भाजपा और शिवसेना के बीच खुली सियासी टकराहट में बदलता नजर आ रहा है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने फिलहाल मनोनीत नगरसेवकों के नामों के गजट नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी है। वहीं, महापौर के पति कमलेश निकम द्वारा भाजपा नेता रवींद्र चव्हाण पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा और पुलिस ने FIR दर्ज की। इस पूरे घटनाक्रम से महायुति की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।

उल्हासनगर में महायुति के भीतर चल रही सत्ता की खींचतान अब सड़क से लेकर कोर्ट और पुलिस थाने तक पहुंच गई है। मनोनीत नगरसेवकों के चयन को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक तरफ बॉम्बे हाई कोर्ट ने चयन प्रक्रिया से जुड़े मामले में अंतरिम रोक लगाई है, तो दूसरी तरफ भाजपा और शिवसेना के स्थानीय नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और टकराव ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
विवाद की शुरुआत 1 अक्टूबर को आयोजित विशेष महासभा से हुई। आरोप है कि नगर निगम आयुक्त ने 2012 के नियमों के तहत सदन के संख्याबल के आधार पर भाजपा के चार उम्मीदवारों और शिवसेना समर्थित आघाडी के तीन नामों की सिफारिश की थी। लेकिन महापौर अश्विनी निकम द्वारा भाजपा के दो नामों को हटाकर केवल दो नाम सदन में रखने और आघाडी के तीन की जगह पांच नाम पेश करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
भाजपा की ओर से प्रदीप रामचंद्रानी और राजेश वधार्या ने इस प्रक्रिया को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। मामले में न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने 5 अक्टूबर को अंतरिम आदेश देते हुए अगली सुनवाई तक मनोनीत नगरसेवकों के नामों का गजट नोटिफिकेशन जारी करने पर रोक लगा दी। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होनी है।
इसी राजनीतिक विवाद के बीच मामला और ज्यादा गंभीर तब हो गया, जब कमलेश निकम ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रवींद्र चव्हाण पर कथित तौर पर 'मनचेकर गैंग' से संबंध होने जैसे गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों के बाद दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तनाव बढ़ा और तीखी बहस एवं गाली-गलौज की स्थिति सामने आई। इसके बाद देर रात पुलिस ने दोनों पक्षों से जुड़े नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज की।
इस घटनाक्रम ने महायुति के भीतर स्थानीय स्तर पर बढ़ती खाई को उजागर कर दिया है। भाजपा और शिवसेना राज्य स्तर पर गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन उल्हासनगर में स्थानीय सत्ता और राजनीतिक वर्चस्व को लेकर दोनों दलों के बीच बढ़ता टकराव आने वाले समय में गठबंधन के लिए चुनौती बन सकता है।
राजनीतिक तौर पर सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यह है कि इस आपसी टकराव का फायदा किसे मिलेगा? स्थानीय राजनीति में कलानी परिवार का लंबे समय से प्रभाव रहा है। भाजपा और शिवसेना के बीच बढ़ती कटुता के बीच यह चर्चा भी तेज है कि कहीं यह संघर्ष किसी तीसरी राजनीतिक ताकत के लिए जमीन तैयार तो नहीं कर रहा।
हालांकि, कलानी परिवार को इस घटनाक्रम से वास्तव में कितना राजनीतिक लाभ मिलेगा, यह फिलहाल कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि हाई कोर्ट की रोक, FIR और भाजपा-शिवसेना के बीच बढ़ते विवाद ने उल्हासनगर की राजनीति को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है।
अब सबकी नजर 12 अक्टूबर की हाई कोर्ट सुनवाई और उसके बाद होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर है।
