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बिहार में भूमिहीन परिवारों की होगी पहचान, सरकारी योजना के तहत जमीन देने की तैयारी
बिहार में भूमिहीन परिवारों को आवासीय जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने नई पहल शुरू की है। भूमिहीन परिवारों की पहचान के लिए जिला स्तर पर डेटा जुटाया जा रहा है। पात्र परिवारों को मौजूदा सरकारी योजनाओं और नियमों के तहत आवासीय जमीन तथा वासगीत पर्चा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

पटना, 8 अक्टूबर 2026: बिहार में भूमिहीन और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आवासीय जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। बिहार राज्य सवर्ण आयोग ने राज्य के जिलों में भूमिहीन सवर्ण परिवारों का डेटा जुटाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य ऐसे परिवारों की पहचान करना है, जिनके पास अपना घर बनाने के लिए जमीन नहीं है और जो सरकारी सहायता के पात्र हो सकते हैं।
जिला स्तर पर तैयार होगा डेटा
रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग जिलों में नियुक्त नोडल अधिकारियों को भूमिहीन परिवारों की पहचान कर उनकी आर्थिक और आवासीय स्थिति की जानकारी जुटाने को कहा गया है। अधिकारियों से पात्र परिवारों की सूची तैयार करने और संबंधित जानकारी प्रशासनिक स्तर पर उपलब्ध कराने को कहा गया है। इस डेटा के माध्यम से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कितने परिवारों के पास आवास के लिए जमीन नहीं है और किन परिवारों को सरकारी योजनाओं के तहत सहायता दी जा सकती है।
पात्र परिवारों को मिल सकता है वासगीत पर्चा
इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य पात्र भूमिहीन परिवारों को नियमों के तहत वासगीत पर्चा उपलब्ध कराने की संभावनाओं की पहचान करना है। वासगीत पर्चा आवासीय भूमि पर कानूनी अधिकार से जुड़ा दस्तावेज है। हालांकि, जमीन का आवंटन पात्रता और लागू सरकारी नियमों के आधार पर ही होगा।
अभियान बसेरा-2 से भी जुड़ी है जमीन की व्यवस्था
बिहार सरकार पहले से ही अभियान बसेरा-2 के तहत भूमिहीन परिवारों को आवासीय जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चला रही है। सितंबर में राज्य के पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाकर पात्र परिवारों से आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र भूमिहीन परिवारों को घर बनाने के लिए 3 डिसमिल जमीन देने का प्रावधान बताया गया है। आवेदन ऑनलाइन और संबंधित अंचल कार्यालय/पंचायत स्तर पर किया जा सकता है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार, विभाग का उद्देश्य आवासीय जमीन से वंचित लोगों को जमीन उपलब्ध कराना और भूमिहीन लोगों के लिए उपलब्ध सरकारी भूमि का नियमानुसार बंदोबस्त करना है।
आगे क्या होगा?
जिला स्तर पर सर्वे और डेटा संग्रह पूरा होने के बाद भूमिहीन परिवारों की वास्तविक संख्या और उनकी स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। इसके आधार पर पात्र परिवारों को मौजूदा सरकारी नियमों और योजनाओं के तहत आवासीय जमीन तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
यानी, बिहार में भूमिहीन परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में दो स्तरों पर काम हो रहा है—एक ओर अभियान बसेरा-2 के तहत पात्र परिवारों को आवासीय जमीन देने की प्रक्रिया, वहीं दूसरी ओर भूमिहीन सवर्ण परिवारों की पहचान के लिए अलग से डेटा तैयार करने की पहल।
