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तेजस MK-1A के लिए राहत, GE ने भेजे 4 और इंजन

तेजस MK-1A कार्यक्रम में लंबे समय से चली आ रही इंजन की कमी अब कम होती दिख रही है। GE Aerospace ने सितंबर 2026 में चार और F404-IN20 इंजन भारत भेजे, जिससे HAL को अब तक कुल 14 इंजन मिल चुके हैं। अक्टूबर से दिसंबर के बीच हर महीने चार और इंजन मिलने की उम्मीद है। HAL के पास करीब 27 एयरफ्रेम पहले से तैयार हैं, लेकिन विमानों की डिलीवरी के लिए AESA रडार, हथियार प्रणाली और अन्य परीक्षण पूरे करना जरूरी है।

Kashish Rai08 अक्टू. 2026, 05:46 PM IST
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तेजस MK-1A के लिए राहत, GE ने भेजे 4 और इंजन

भारतीय वायु सेना के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस MK-1A कार्यक्रम के लिए इंजन आपूर्ति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। लंबे समय से F404-IN20 इंजनों की कमी इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी अड़चनों में से एक रही है। अब अमेरिकी कंपनी GE Aerospace ने सितंबर 2026 में चार और इंजन भारत भेजे हैं। इसके साथ ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को अब तक कुल 14 इंजन प्राप्त हो चुके हैं।

सरकार को उम्मीद है कि अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच हर महीने चार-चार इंजन की आपूर्ति होगी। अगर यह रफ्तार बनी रहती है, तो साल के अंत तक HAL के पास 20 से अधिक इंजन उपलब्ध हो सकते हैं। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी के पास पहले से करीब 27 तेजस MK-1A एयरफ्रेम तैयार हैं। हालांकि, केवल एयरफ्रेम और इंजन उपलब्ध होना विमान को वायु सेना में शामिल करने के लिए पर्याप्त नहीं है। AESA रडार, हथियार प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों के इंटीग्रेशन और परीक्षण भी पूरे करने होंगे।

इंजन सप्लाई में आया सुधार

HAL और GE Aerospace के बीच 2021 में 99 F404-IN20 इंजनों की आपूर्ति के लिए करीब 5,375 करोड़ रुपये का अनुबंध हुआ था। पहला इंजन मार्च 2025 में भारत पहुंचा था, लेकिन इसके बाद आपूर्ति की गति अपेक्षाकृत धीमी रही। अगस्त 2026 में तीन इंजन आए और सितंबर में चार और इंजन मिलने के बाद कुल संख्या 14 हो गई। GE Aerospace ने 2026 में 20 इंजन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा था। अब अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में चार-चार इंजन मिलने की योजना है। इससे HAL को तैयार एयरफ्रेम को आगे बढ़ाने और उत्पादन प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिल सकती है। सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक तेजस MK-1A का कम से कम एक पूरा स्क्वॉड्रन वायु सेना में शामिल करना है।

वायु सेना के सामने लड़ाकू विमानों की कमी

तेजस की जल्द डिलीवरी भारतीय वायु सेना के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसकी लड़ाकू स्क्वॉड्रनों की संख्या स्वीकृत संख्या से कम है। पुराने मिग-21 विमानों को चरणबद्ध तरीके से सेवा से हटाए जाने के बीच नए लड़ाकू विमानों की आवश्यकता बढ़ गई है। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में देरी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि स्क्वॉड्रन संख्या में कमी को रोकने और क्षमता बढ़ाने के लिए आने वाले वर्षों में हर साल बड़ी संख्या में नए लड़ाकू विमान शामिल करने की जरूरत होगी।

तेजस MK-1A के 180 विमानों का ऑर्डर

भारतीय वायु सेना ने HAL को कुल 180 तेजस MK-1A विमानों के ऑर्डर दिए हैं। पहला अनुबंध फरवरी 2021 में 83 विमानों के लिए हुआ था। इसके बाद सितंबर 2025 में 97 अतिरिक्त विमानों का दूसरा ऑर्डर दिया गया, जिसमें 68 लड़ाकू और 29 ट्विन-सीटर विमान शामिल हैं। दूसरे ऑर्डर में स्वदेशी तकनीक पर भी ज्यादा जोर दिया गया है। इन विमानों में 64 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री रखने का लक्ष्य है। इसमें स्वदेशी उत्तम AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक सेल्फ-प्रोटेक्शन सिस्टम और स्वदेशी कंट्रोल सरफेस एक्ट्यूएटर जैसे सिस्टम शामिल हैं। इससे तेजस कार्यक्रम में विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।

आगे की चुनौती उत्पादन और परीक्षण

HAL ने दूसरे कार्यक्रम के लिए GE Aerospace के साथ 113 अतिरिक्त F404-GE-IN20 इंजनों और संबंधित सपोर्ट पैकेज का समझौता भी किया है। इन इंजनों की आपूर्ति 2027 से 2032 के बीच होने की योजना है। इससे आने वाले वर्षों में तेजस MK-1A के उत्पादन के लिए इंजन की जरूरत पूरी करने में मदद मिल सकती है। HAL उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है और सालाना करीब 24 विमानों के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल चुनौती यह है कि तैयार 27 एयरफ्रेम को इंजन, रडार और हथियार प्रणालियों के साथ जोड़कर परीक्षण और स्वीकृति की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाए।

इंजन की आपूर्ति में सुधार से तेजस MK-1A कार्यक्रम की एक बड़ी बाधा कम होती दिखाई दे रही है। हालांकि, विमान की वास्तविक डिलीवरी के लिए इंजन फिटमेंट के बाद ग्राउंड टेस्ट, इंजन रन, उड़ान परीक्षण और अंतिम स्वीकृति जैसे कई चरण पूरे करने होंगे। इसलिए आने वाले महीनों में इंजन सप्लाई के साथ-साथ इन परीक्षणों की गति भी यह तय करेगी कि तेजस MK-1A वायु सेना में कितनी जल्दी शामिल हो पाता है।