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नोएडा एयरपोर्ट का नाम होगा नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पूर्व अग्निवीरों को 20% आरक्षण; उम्र में 3 साल की छूट
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के दो अहम फैसले चर्चा में हैं। जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम अब ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट नोएडा’ रखा जाएगा। वहीं, पूर्व अग्निवीरों को जेल वार्डर और परिवहन विभाग के प्रवर्तन सिपाही पदों की सीधी भर्ती में 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और अधिकतम आयु सीमा में तीन साल की छूट देने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। जानिए एयरपोर्ट के नामकरण और अग्निवीरों की भर्ती से जुड़े फैसलों की पूरी जानकारी।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में एयरपोर्ट के नामकरण से लेकर पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरी में अवसर देने तक, योगी सरकार के दो फैसले सुर्खियों में हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9 अक्टूबर 2026 को जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने की घोषणा की। इससे पहले 15 सितंबर को प्रदेश कैबिनेट ने पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी भर्ती में आरक्षण और आयु सीमा में छूट को मंजूरी दी थी। दोनों फैसले अलग-अलग तारीखों पर लिए गए हैं।
जेवर एयरपोर्ट अब किस नाम से जाना जाएगा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के मुताबिक, गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट नोएडा’ होगा। यह परियोजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ एक अतिरिक्त प्रमुख विमानन केंद्र के रूप में विकसित की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च 2026 को एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया था। इसके बाद 15 जून 2026 को यहां से व्यावसायिक उड़ान सेवाएं शुरू हुईं। एयरपोर्ट की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पहले चरण में इसकी सालाना यात्री क्षमता करीब 1.2 करोड़ यात्रियों की है। भविष्य में विस्तार के बाद इसकी क्षमता और बढ़ाने की योजना है। इस एयरपोर्ट से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR के यात्रियों को हवाई यात्रा के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। इससे क्षेत्र में परिवहन, व्यापार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पूर्व अग्निवीरों को कहां मिलेगा 20% आरक्षण?
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 15 सितंबर 2026 को पूर्व अग्निवीरों के लिए दो सरकारी पदों की सीधी भर्ती में 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को मंजूरी दी थी। ये पद हैं:
- जेल वार्डर: कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग।
- प्रवर्तन सिपाही: परिवहन विभाग।इस व्यवस्था का उद्देश्य सैन्य सेवा पूरी करने के बाद युवाओं को सरकारी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। पूर्व अग्निवीरों को उनके संबंधित सामाजिक वर्ग के भीतर क्षैतिज आरक्षण के तहत समायोजित किया जाएगा। इसका मतलब है कि यह आरक्षण अलग सामाजिक श्रेणी बनाने के बजाय लागू श्रेणियों के भीतर दिया जाता है।
उम्र सीमा में मिलेगी तीन साल की छूट
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, पात्र पूर्व अग्निवीरों को अधिकतम आयु सीमा में तीन साल की विशेष छूट देने का प्रावधान है। रिपोर्ट के अनुसार, चार साल की सैन्य सेवा अवधि को आयु की गणना में समायोजित करने की व्यवस्था भी शामिल है। इससे उन युवाओं को राहत मिल सकती है जो अग्निवीर के रूप में अपनी सेवा पूरी करने के बाद सरकारी भर्ती में शामिल होना चाहते हैं। हालांकि, आरक्षण और आयु सीमा में छूट का लाभ लेने के लिए उम्मीदवारों को संबंधित भर्ती की आधिकारिक अधिसूचना में दी गई पात्रता और शर्तों का पालन करना होगा।
क्या अग्निवीरों को बिना परीक्षा सीधे नौकरी मिलेगी?
पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण और आयु सीमा में छूट की मंजूरी को सीधे नियुक्ति के बराबर नहीं समझना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों में यह पुष्टि नहीं है कि उत्तर प्रदेश में जेल वार्डर और प्रवर्तन सिपाही के पदों पर बिना परीक्षा या चयन प्रक्रिया के नौकरी दी जाएगी। इसलिए उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया, लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षण और अन्य चयन संबंधी शर्तों के बारे में संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए। किसी दूसरी केंद्रीय भर्ती में लागू परीक्षा संबंधी छूट को उत्तर प्रदेश की इन भर्तियों पर स्वतः लागू नहीं माना जा सकता।
उत्तर प्रदेश के लिए क्यों अहम हैं ये फैसले?
जेवर एयरपोर्ट के नामकरण की घोषणा राज्य की एक बड़ी विमानन परियोजना को नई पहचान देती है। वहीं, पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण और आयु सीमा में छूट का फैसला सैन्य सेवा के बाद रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एक ओर एयरपोर्ट से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, तो दूसरी ओर भर्ती में आरक्षण से पात्र पूर्व अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं में अवसर मिल सकता है।
