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हल्द्वानी में नीतू बिष्ट के काली रूप वाले वीडियो पर विवाद, करणी सेना ने FIR की मांग की

उत्तराखंड के हल्द्वानी में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नीतू बिष्ट के एक वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। करणी सेना और अन्य संगठनों ने आरोप लगाया कि वीडियो में मां काली के स्वरूप को अमर्यादित तरीके से पेश किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। संगठनों ने पुलिस को शिकायत देकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की है।

Kashish Rai15 अक्टू. 2026, 04:40 PM IST
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हल्द्वानी में नीतू बिष्ट के काली रूप वाले वीडियो पर विवाद, करणी सेना ने FIR की मांग की

उत्तराखंड के हल्द्वानी में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नीतू बिष्ट के खिलाफ मां काली के स्वरूप को लेकर बनाए गए एक वीडियो पर विवाद बढ़ गया है। इंस्टाग्राम पर करीब 50 लाख फॉलोअर्स वाली नीतू बिष्ट पर आरोप है कि उन्होंने मां काली का रूप धारण कर ऐसा वीडियो बनाया, जिसे कुछ संगठनों ने धार्मिक मर्यादा के खिलाफ बताया है। इस मामले को लेकर करणी सेना और अन्य संगठनों ने नाराजगी जताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। करणी सेना की महिला जिला अध्यक्ष योगिता बनोला के नेतृत्व में कार्यकर्ता हल्द्वानी कोतवाली पहुंचे। यहां उन्होंने पुलिस को शिकायती पत्र सौंपकर नीतू बिष्ट के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वीडियो में मां काली के पवित्र स्वरूप को आपत्तिजनक तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि नीतू बिष्ट इस रूप में सार्वजनिक सड़कों पर घूमती दिखाई दीं, जिससे बच्चों और आम लोगों में डर का माहौल बना।

करणी सेना ने पुलिस से भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि धार्मिक प्रतीकों और देवी-देवताओं के स्वरूप को सोशल मीडिया पर प्रस्तुत करते समय उनकी गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि वीडियो की जांच कर यह तय किया जाए कि इसमें किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं। इस मामले में करणी सेना के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष जोगेंद्र राणा और जिला अध्यक्ष दीपांशु ने भी नाराजगी जताई है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर सकता है।

फिलहाल मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण है। वीडियो की वास्तविक सामग्री, उसे बनाने की परिस्थितियों और शिकायतकर्ताओं की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जा सकती है। नीतू बिष्ट का पक्ष और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।