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सड़क हादसा पीड़ितों के मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बीमा रहित वाहनों पर भी केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सड़क हादसा पीड़ितों के लिए अंतरिम मुआवजा योजना का व्यापक प्रचार करने और इसे जल्द आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने बीमा रहित वाहनों से जुड़े हादसों में मुआवजे की पात्रता पर भी केंद्र से स्पष्टीकरण मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए बनाई गई ‘कम्पेन्सेशन टू विक्टिम्स (इंटरिम रिलीफ) स्कीम, 2026’ का व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने योजना को जल्द आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में प्रकाशित करने और इसे लागू करने की प्रक्रिया की जानकारी अगली सुनवाई में देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा देने से जुड़े कानूनी प्रावधानों को लागू नहीं करने और सड़क हादसों के आंकड़े प्रकाशित करने में कथित अनुपालन की कमी को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इसी दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से अंतरिम मुआवजे की योजना के क्रियान्वयन को लेकर निर्देश जारी किए।
16 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वर्ष 2026 की अंतरिम राहत योजना तैयार कर ली है। पीठ ने कहा कि योजना का व्यापक प्रचार किया जाना चाहिए, ताकि सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों और मृतक के कानूनी वारिसों को अपने अधिकारों की जानकारी मिल सके। अदालत ने केंद्र से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि क्या यह योजना उन दुर्घटनाओं पर भी लागू होगी, जिनमें शामिल वाहन का बीमा नहीं है।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 164A के तहत योजना
यह योजना मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 164A के तहत तैयार की गई है। इस प्रावधान के अंतर्गत केंद्र सरकार सड़क दुर्घटना के मुआवजे का दावा करने वाले लोगों को अंतरिम राहत देने के लिए योजना बना सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने 28 अप्रैल 2025 को केंद्र को निर्देश दिया था कि वह धारा 164A के तहत जल्द से जल्द योजना तैयार करे और किसी भी स्थिति में चार महीने के भीतर यह काम पूरा करे। उस समय अदालत ने ध्यान दिलाया था कि संबंधित प्रावधान 1 अप्रैल 2022 से लागू होने के बावजूद तीन साल तक इस पर अमल नहीं किया गया था।
कैसे कर सकेंगे अंतरिम मुआवजे के लिए आवेदन?
सुनवाई के दौरान अदालत ने योजना के क्लॉज 6 का परीक्षण किया, जिसमें अंतरिम मुआवजे के लिए आवेदन की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इस प्रक्रिया के अनुसार, दुर्घटना में पीड़ित व्यक्ति या मृतक के कानूनी वारिस निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (Motor Accident Claims Tribunal—MACT) में मुआवजे के लिए दायर या लंबित दावे का विवरण भी देना होगा। इसके बाद आवेदन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) को भेजा जाना है। हालांकि, योजना के तहत बीमा रहित वाहनों से जुड़े मामलों की पात्रता पर स्पष्टीकरण अभी महत्वपूर्ण है।
अगली सुनवाई में केंद्र को देनी होगी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को योजना जल्द आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित करने और इसे प्रभावी बनाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी अगली सुनवाई में देने का निर्देश दिया है। अदालत के निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरिम राहत की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों तक इसकी जानकारी पहुंचे और वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने अधिकारों का उपयोग कर सकें।
