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लखनऊ-प्रयागराज में कुत्तों के हमलों पर हाईकोर्ट सख्त, डॉग-बाइट हॉटस्पॉट चिह्नित कर आक्रामक कुत्तों को हटाने का आदेश
उत्तर प्रदेश में कुत्तों के काटने की घटनाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने लखनऊ और प्रयागराज के नगर आयुक्तों को निर्देश दिया है कि वे कुत्तों के हमलों वाले हॉटस्पॉट की पहचान करें और बार-बार हमला करने वाले या आक्रामक व्यवहार दिखाने वाले कुत्तों को मानवीय तरीके से पकड़कर निर्धारित केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था करें। अदालत ने इस पूरी प्रक्रिया को एक महीने के भीतर पूरा करने और कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

तीन साल की घटनाओं का मांगा ब्योरा
न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने 1 अक्टूबर 2026 को यह निर्देश आवारा कुत्तों और उनके काटने की घटनाओं से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन की निगरानी के दौरान दिए। हाईकोर्ट ने अधिकारियों से पिछले तीन वर्षों में दर्ज कुत्तों के काटने की घटनाओं, नगर निकायों में मिली शिकायतों और पशु चिकित्सा संबंधी रिकॉर्ड का ब्योरा मांगा है। अधिकारियों को साल-दर-साल और क्षेत्रवार विवरण तैयार करना होगा, ताकि उन इलाकों की पहचान की जा सके जहां ऐसी घटनाएं बार-बार हुई हैं या उनमें वृद्धि दर्ज की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल कागजों पर प्रशासनिक कदम उठाना पर्याप्त नहीं है। यह भी जांचना जरूरी है कि अधिकारियों की कार्रवाई वास्तव में जमीन पर लागू हुई है या नहीं।
अस्पतालों, स्कूलों और रेलवे स्टेशनों का भी होगा निरीक्षण
अदालत ने लखनऊ और प्रयागराज के नगर आयुक्तों को कुत्तों के काटने के रिकॉर्ड से पहचाने गए इलाकों के अतिरिक्त कम से कम 30 अन्य स्थानों को निरीक्षण के लिए चिह्नित करने का निर्देश दिया है। इनमें बड़े अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन, बाजार, पार्क और सार्वजनिक आवाजाही वाले अन्य स्थान शामिल होंगे। इन स्थानों के परिसर, आसपास की सड़कों और प्रवेश मार्गों का भी निरीक्षण किया जाएगा। पशु चिकित्सा और नगर निकाय के अधिकारियों को प्रत्येक स्थान पर जाकर कुत्तों की अनुमानित संख्या दर्ज करनी होगी। संख्या का आकलन किस तारीख को और किस तरीके से किया गया, इसका विवरण भी रिपोर्ट में देना होगा। अधिकारियों को पिछले तीन वर्षों में कुत्तों को हटाने, उनकी नसबंदी कराने और टीकाकरण से संबंधित कार्रवाई का ब्योरा भी प्रस्तुत करना होगा।
आक्रामक कुत्तों को अलग रखकर होगा उपचार
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पकड़े गए कुत्तों को चिन्हित पशु जन्म नियंत्रण (Animal Birth Control-ABC) केंद्र या उपयुक्त पशु चिकित्सा केंद्र में ले जाया जाए। वहां उनकी जांच, उपचार, नसबंदी और आवश्यक टीकाकरण किया जाएगा। बार-बार हमला करने वाले या आक्रामक व्यवहार दिखाने वाले कुत्तों की अलग से पहचान और जांच करनी होगी। रेबीज से संक्रमित होने का संदेह होने पर भी उचित पृथक्करण या क्वारंटीन की व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों को प्रत्येक कुत्ते की पहचान, उसे पकड़े जाने के स्थान, संबंधित केंद्र और उसके बाद की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड रखना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि बार-बार हमलों से जुड़े कुत्तों को हटाने के बाद उन्हें कहां रखा गया और उनके संबंध में क्या कदम उठाए गए, इसकी अलग जानकारी दी जाए।
5 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने पूरी प्रक्रिया एक महीने में पूरी करने और अनुपालन हलफनामे के जरिए कार्रवाई का विवरण देने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 5 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। अदालत की निगरानी का उद्देश्य कुत्तों के काटने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई की वास्तविक स्थिति का आकलन करना और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों की समीक्षा करना है। साथ ही, कुत्तों को पकड़ने और उनके प्रबंधन में मानवीय तरीके अपनाने पर भी जोर दिया गया है।
