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कैंसर मरीजों को राहत: 137 दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% तक सीमित
भारत सरकार ने कैंसर मरीजों को राहत देने और उपचार को अधिक किफायती बनाने के उद्देश्य से 137 चयनित कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को अधिकतम 30% तक सीमित करने का निर्णय लिया है। इस कदम से संबंधित दवाओं की खुदरा कीमतों में कमी आने और मरीजों के इलाज पर होने वाला आर्थिक बोझ घटने की उम्मीद है।

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: कैंसर के मरीजों और उनके परिवारों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने 137 कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन की सीमा 30 प्रतिशत निर्धारित की है। सरकार के इस फैसले से इन दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में 70 प्रतिशत तक की कमी आने की उम्मीद है। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी।
क्या है सरकार का फैसला?
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 137 चयनित गैर-अनुसूचित कैंसर-रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (GST को छोड़कर) के 30 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री के दौरान वितरकों, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं द्वारा लगाए जाने वाले अत्यधिक मार्जिन को नियंत्रित करना है। इस निर्णय से कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई महंगी दवाओं की कीमतें कम होने की संभावना है। हालांकि, प्रत्येक दवा की कीमत में वास्तविक कमी उसकी मौजूदा मूल्य संरचना और व्यापारिक मार्जिन पर निर्भर करेगी।
किन दवाओं को मिलेगा लाभ?
इस फैसले में विभिन्न प्रकार के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को शामिल किया गया है। इनमें इम्यूनोथेरेपी की कुछ दवाएँ भी शामिल हैं, जिनका उपयोग 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के उपचार में किया जाता है।
Pembrolizumab: विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवा।
Durvalumab: कुछ प्रकार के कैंसर के उपचार में उपयोग की जाने वाली इम्यूनोथेरेपी दवा।
Osimertinib: कुछ प्रकार के फेफड़ों के कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवा।
Bevacizumab: कोलोरेक्टल, डिम्बग्रंथि और गर्भाशय ग्रीवा सहित कुछ कैंसर के उपचार में उपयोग की जाने वाली दवा।
Denosumab: कुछ परिस्थितियों में स्तन और प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों की देखभाल में इस्तेमाल होने वाली दवा।
मरीजों को कैसे मिलेगी राहत?
कैंसर का इलाज लंबे समय तक चल सकता है और इसमें दवाओं पर काफी खर्च होता है। महंगी दवाओं की वजह से कई परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य दवाओं की कीमतों में अत्यधिक व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना और मरीजों के लिए उपचार को अधिक किफायती बनाना है। हालांकि, सभी दवाओं की कीमतों में 70 प्रतिशत की कमी नहीं होगी। वास्तविक बचत दवा के प्रकार, उसकी मौजूदा कीमत और संशोधित मूल्य के आधार पर अलग-अलग होगी।
कंपनियों और अस्पतालों के लिए क्या निर्देश हैं?
सरकार ने दवा निर्माताओं को अधिसूचना जारी होने के सात दिनों के भीतर संशोधित कीमतों की जानकारी राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण को देने का निर्देश दिया है। 9 नवंबर 2026 से संबंधित दवाओं की संशोधित कीमतें लागू होंगी। दवा कंपनियों, अस्पतालों और खुदरा विक्रेताओं को नई कीमतों का पालन करना होगा। अस्पतालों को भी संशोधित मूल्य सूची प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होगी। इसके अलावा, दवाओं की नियमित उपलब्धता बनाए रखने के लिए निर्माताओं को मौजूदा उत्पादन और आपूर्ति स्तर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पहले भी उठाए गए थे ऐसे कदम
वर्ष 2019 में सरकार ने 42 कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को सीमित करने की पहल की थी। सरकारी जानकारी के अनुसार, उस कदम के बाद 526 ब्रांड की गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में 90 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई थी। वर्तमान निर्णय के तहत इस व्यवस्था को 137 अतिरिक्त चयनित दवाओं तक विस्तारित किया गया है। कैंसर-रोधी 137 दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन की सीमा निर्धारित करना भारत में कैंसर के इलाज को अधिक किफायती बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि संशोधित कीमतें प्रभावी ढंग से लागू होती हैं और दवाओं की नियमित आपूर्ति बनी रहती है, तो इससे मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
