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मरीजों की सुरक्षा पर केंद्र सख्त, सिंगल-यूज मेडिकल उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल पर रोक
केंद्र सरकार ने मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अस्पतालों में संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए सिंगल-यूज मेडिकल उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सरकारी और निजी अस्पतालों में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026: मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अस्पतालों में संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने सिंगल-यूज मेडिकल डिवाइस और डिस्पोजेबल सर्जिकल उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल पर रोक को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सरकारी और निजी अस्पतालों में इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
यह निर्देश ऐसे मामलों की जानकारी सामने आने के बाद दिया गया है, जिनमें कुछ निजी और कॉर्पोरेट अस्पतालों में एक बार इस्तेमाल के लिए बनाए गए चिकित्सा उपकरणों को स्टरलाइज यानी संक्रमणमुक्त करके दोबारा इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें मिली थीं। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रथा मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
किन मेडिकल उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल पर रोक?
सिंगल-यूज मेडिकल डिवाइस ऐसे उपकरण होते हैं, जिन्हें निर्माता केवल एक बार इस्तेमाल करने के लिए तैयार करता है। इनमें कार्डियक कैथेटर, गाइडवायर, बैलून कैथेटर, डायलिसिस से जुड़े कुछ उपकरण, सर्जिकल स्टेपलर, लैप्रोस्कोपिक ट्रोकार और कुछ डिस्पोजेबल सर्जिकल उपकरण शामिल हो सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ अस्पतालों में कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी और न्यूरोसर्जरी जैसी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को दोबारा उपयोग में लाने की जानकारी सामने आई है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने स्पष्ट किया है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल निर्माता की ओर से दिए गए निर्देशों और सिफारिशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। केवल स्टरलाइज कर देने से किसी एक बार इस्तेमाल के लिए बने उपकरण को दोबारा उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
दोबारा इस्तेमाल से मरीजों को क्या खतरे?
एक बार इस्तेमाल के लिए बनाए गए मेडिकल उपकरणों को दोबारा इस्तेमाल करने से मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। यदि उपकरण की सफाई या संक्रमणमुक्त करने की प्रक्रिया पर्याप्त न हो, तो उस पर जैविक अवशेष रह सकते हैं। बार-बार इस्तेमाल से उपकरण की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है। इससे मरीजों को क्रॉस-इन्फेक्शन, उपकरण में खराबी और उपचार के दौरान अन्य जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण जैसे जोखिम भी चिंता का विषय हैं। इसी कारण स्वास्थ्य अधिकारियों ने अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे उपकरणों के इस्तेमाल और निपटान से संबंधित निर्धारित नियमों का पालन करें और मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता न करें।
मरीजों से पूरी कीमत वसूलने पर भी चिंता
इस मामले में एक अन्य गंभीर चिंता यह है कि कुछ मामलों में दोबारा इस्तेमाल किए गए उपकरणों के लिए भी मरीजों से पूरी कीमत वसूले जाने या सरकारी एजेंसियों से उसका भुगतान प्राप्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसी स्थिति में मरीजों के उपचार खर्च और उनके अधिकारों को लेकर सवाल उठते हैं। अधिकारियों ने अस्पतालों में नियमों के पालन की निगरानी बढ़ाने और किसी भी उल्लंघन पर लागू कानूनों के तहत कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
राज्यों और अस्पतालों को दिए गए निर्देश
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों, स्वास्थ्य सेवा निदेशकों, औषधि नियंत्रकों और भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) सहित संबंधित अधिकारियों से नियमों को प्रभावी ढंग से लागू कराने को कहा है। निर्देश के तहत स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण और निगरानी की जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कानूनों और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940, मेडिकल डिवाइस नियम, 2017 और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स अधिनियम, 2010 सहित संक्रमण नियंत्रण और जैव-चिकित्सीय कचरा प्रबंधन से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है।
मरीजों की सुरक्षा पर जोर
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने इस कदम का समर्थन किया है और कहा है कि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इसके लिए अस्पतालों का नियमित निरीक्षण, मेडिकल उपकरणों के इस्तेमाल और निपटान का रिकॉर्ड रखना तथा स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमण नियंत्रण संबंधी प्रशिक्षण देना महत्वपूर्ण हो सकता है।सिंगल-यूज मेडिकल उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल पर रोक को सख्ती से लागू करने का उद्देश्य मरीजों को संक्रमण और उपचार संबंधी जोखिमों से बचाना है। हालांकि, इस निर्देश की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य सरकारें, नियामक संस्थाएं और अस्पताल इसे कितनी गंभीरता से लागू करते हैं।
