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पश्चिम बंगाल में डेंगू का कहर! अक्टूबर में 5,500 से अधिक नए मामले
पश्चिम बंगाल में डेंगू के मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अक्टूबर 2026 के पहले 23 दिनों में राज्य में 5,500 से अधिक नए मामले सामने आए। कोलकाता, हावड़ा, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना सहित कई क्षेत्रों में संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में डेंगू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के पहले 24 दिनों में डेंगू के 5,751 नए मामले सामने आए हैं। संक्रमण में तेजी को देखते हुए सोमवार को कोलकाता स्थित स्वास्थ्य भवन में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई, जिसमें राज्य में डेंगू की स्थिति और रोकथाम के उपायों की समीक्षा की जानी है।
अक्टूबर में तेजी से बढ़े डेंगू के मामले
अगस्त 2026: लगभग 2,020 नए मामले।
सितंबर 2026: लगभग 3,172 नए मामले।
1 से 24 अक्टूबर 2026: 5,751 नए मामले।
2026 में 24 अक्टूबर तक: कुल 12,889 मामले दर्ज किए गए।
दर्ज मौतें: 15।
अस्पतालों में भर्ती मरीज: लगभग 290।
ये आंकड़े मीडिया रिपोर्टों में स्वास्थ्य विभाग के हवाले से प्रकाशित किए गए हैं। नए मामले सामने आने के साथ इनकी संख्या बदल सकती है।
मुरशीदाबाद, कोलकाता और हावड़ा में अधिक मामले
डेंगू के मामलों की संख्या के लिहाज से मुरशीदाबाद प्रमुख प्रभावित जिलों में शामिल है। इसके अलावा कोलकाता, उत्तर 24 परगना, हावड़ा, दक्षिण 24 परगना और मालदा में भी संक्रमण को लेकर चिंता बनी हुई है। रिपोर्टों में बताया गया है कि शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में डेंगू के मामलों पर निगरानी रखी जा रही है। कुछ इलाकों में मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों को रोकथाम के प्रयास तेज करने पड़े हैं।
स्वास्थ्य भवन में उच्चस्तरीय बैठक
डेंगू के बढ़ते मामलों की समीक्षा करने और रोकथाम के उपायों में संभावित कमियों का पता लगाने के लिए 26 अक्टूबर को स्वास्थ्य भवन में उच्चस्तरीय बैठक निर्धारित की गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में सरकारी अस्पतालों के प्रतिनिधियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, जिलाधिकारियों, जिला स्वास्थ्य अधिकारियों और नगर निकायों के अधिकारियों के शामिल होने की जानकारी दी गई। बैठक का उद्देश्य संक्रमण की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करना और डेंगू की रोकथाम के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा करना है। बैठक के बाद घोषित होने वाले नए उपायों की पुष्टि संबंधित सरकारी सूचनाओं से की जानी चाहिए।
डेंगू के मामले बढ़ने के पीछे क्या कारण हैं?
डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलती है। बारिश के बाद जमा हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर सकता है। घर के आसपास रखे खुले बर्तन, गमले, पानी की टंकियां, कूलर और अन्य कंटेनरों में जमा पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। इसलिए डेंगू की रोकथाम के लिए व्यक्तिगत सावधानी के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों की नियमित सफाई भी जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और रोकथाम के प्रयास
सितंबर में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू की निगरानी बढ़ाने के लिए घर-घर जाकर बुखार के मरीजों की पहचान करने, जरूरत पड़ने पर जांच कराने और प्रभावित क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाने जैसे उपायों के निर्देश दिए थे। रिपोर्टों में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच की उपलब्धता बढ़ाने और अधिक मामले सामने आने वाले क्षेत्रों में विशेष चिकित्सा शिविर लगाने की योजनाओं का भी उल्लेख किया गया था। इन उपायों का उद्देश्य संक्रमण की जल्द पहचान करना और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।
डेंगू के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
अचानक तेज बुखार।
तेज सिरदर्द।
आंखों के पीछे दर्द।
मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द।
मतली या उल्टी।
त्वचा पर लाल चकत्ते।
अत्यधिक थकान और कमजोरी।
हर बुखार डेंगू नहीं होता। हालांकि, डेंगू प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगों को बुखार होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
इन चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज न करें
पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, खून की उल्टी, मल में खून, सांस लेने में कठिनाई या असामान्य रूप से सुस्ती जैसे लक्षण गंभीर डेंगू के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
बुखार कम होने के बाद भी कुछ मरीजों की स्थिति गंभीर हो सकती है, इसलिए केवल बुखार उतरने को पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं मानना चाहिए।
डेंगू से बचाव के लिए क्या करें?
घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
कूलर, गमलों, बाल्टियों और पानी के कंटेनरों की नियमित सफाई करें।
पानी की टंकियों को ढककर रखें।
मच्छरों से बचने के लिए उपयुक्त रिपेलेंट और पूरी बांह के कपड़ों का इस्तेमाल करें।
खिड़कियों और दरवाजों पर मच्छररोधी जाली लगाएं।
बुखार होने पर डॉक्टर से सलाह लें और जरूरत के अनुसार जांच कराएं।
डेंगू का संदेह होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं न लें। विशेष रूप से एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचें, क्योंकि वे रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
पिछले साल की तुलना में स्थिति कैसी है?
कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि 2026 में अब तक दर्ज डेंगू के कुल मामले पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में कम रहे हैं। हालांकि, अक्टूबर में नए मामलों की तेज वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है। इसलिए कुल वार्षिक आंकड़ों के साथ-साथ हाल के दिनों में संक्रमण की रफ्तार, अस्पतालों में भर्ती मरीजों और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर भी नजर रखना जरूरी है। पश्चिम बंगाल में अक्टूबर के दौरान डेंगू के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है।
24 अक्टूबर तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में इस वर्ष कुल 12,889 मामले और 15 मौतें दर्ज की गई थीं। संक्रमण की स्थिति की समीक्षा के लिए 26 अक्टूबर को स्वास्थ्य भवन में उच्चस्तरीय बैठक निर्धारित की गई। डेंगू पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग की निगरानी, समय पर जांच, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना और नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। लोगों को लक्षणों के प्रति सतर्क रहना चाहिए और गंभीर संकेत दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
