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झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज, JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर फिर गरमाया विवाद

झारखंड के रांची में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया। विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। छात्र CBI जांच समेत भर्ती प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की चिंताओं को बातचीत के जरिए सुलझाने की बात कही है।

Neha Sharma10 अग. 2026, 05:38 PM IST
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झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज, JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर फिर गरमाया विवाद
रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब और तेज हो गया है। रांची में JPSC और JSSC के अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर मार्च किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच तनाव की स्थिति बन गई और पुलिस ने लाठीचार्ज के साथ-साथ वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 

क्या है छात्रों का पूरा मामला? 
छात्र लंबे समय से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की कमी को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन की प्रमुख मांगों में CBI जांच, भर्ती प्रक्रिया में सुधार और परीक्षाओं में पारदर्शिता शामिल हैं। छात्रों का आरोप है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं ने हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है।  छात्रों ने खास तौर पर JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा और JSSC-CGL से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि राज्य की एजेंसियों की जांच पर उनका भरोसा पूरी तरह कायम नहीं है, इसलिए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से कराई जानी चाहिए। 

कई दिनों से जारी है आंदोलन
यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है। अभ्यर्थी कई दिनों से रांची में धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन CBI जांच समेत कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद छात्रों ने विधानसभा घेराव का ऐलान किया और बड़ी संख्या में अभ्यर्थी विधानसभा की ओर बढ़े। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने JPSC की प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की मांग पर सहमति जताई है, लेकिन छात्रों की CBI जांच की मांग अभी भी प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। JSSC-CGL परीक्षा को लेकर भी छात्रों और सरकार के बीच मतभेद बने हुए हैं। 

विधानसभा मार्च के दौरान क्या हुआ?
विधानसभा की ओर बढ़ रहे छात्रों को रोकने के लिए प्रशासन ने कई जगह बैरिकेड लगाए थे। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं।  एक घायल छात्र ने पुलिस कार्रवाई को “बर्बर” बताते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे और पुलिस ने अचानक बल प्रयोग किया। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई से पहले प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड पार करने की कोशिश की गई थी—इसलिए पूरे घटनाक्रम को केवल एक पक्ष के दावे के आधार पर देखना उचित नहीं होगा। 
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छात्रों का सवाल—आवाज सुनने के बजाय बल प्रयोग क्यों?
पुलिस कार्रवाई के बाद छात्रों और विभिन्न राजनीतिक नेताओं की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि रोजगार और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे युवाओं के साथ बातचीत के जरिए समाधान क्यों नहीं निकाला गया। छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल एक परीक्षा या एक भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। वहीं, प्रशासन का पक्ष यह है कि विधानसभा क्षेत्र की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी था। प्रदर्शनकारियों के विधानसभा की ओर बढ़ने और बैरिकेड पार करने की कोशिश के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की। 

हेमंत सोरेन ने क्या कहा?
इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से बातचीत के जरिए अपनी समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंताएं सरकार की चिंताएं हैं और समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। 

मामला सिर्फ एक प्रदर्शन का नहीं
झारखंड का यह छात्र आंदोलन अब भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और सरकारी संस्थाओं पर युवाओं के भरोसे का बड़ा सवाल बन गया है। लाखों युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं और उनके लिए किसी भी परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मतलब वर्षों की मेहनत और भविष्य पर असर हो सकता है। ऐसे में छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना, जांच प्रक्रिया को पारदर्शी रखना और सरकार तथा अभ्यर्थियों के बीच संवाद बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। लाठी और बल प्रयोग से तत्काल भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन छात्रों के मन में उठ रहे सवालों का समाधान केवल निष्पक्ष जांच और भरोसेमंद प्रक्रिया से ही संभव है।