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मोडी लिपि से सामने आई शिवकालीन समृद्धि; ठाणे में ऐतिहासिक दस्तावेजों की प्रदर्शनी
महाराष्ट्र के इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाने वाली मोडी लिपि से विद्यार्थियों को परिचित कराने और शिवकालीन प्रशासन तथा उस दौर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझाने के उद्देश्य से ठाणे के सतीश प्रधान ज्ञानसाधना महाविद्यालय में विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई। प्रदर्शनी में छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति संभाजी महाराज और छत्रपति राजाराम महाराज के कालखंड से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक दस्तावेजों के साथ मराठा साम्राज्य के प्रशासन से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेख प्रदर्शित किए गए।
Priyanka Gaikwad08 अग. 2026, 02:05 PM IST

ठाणे (Thane ) : मोडी लिपि महाराष्ट्र के इतिहास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण लिपि है। पुराने समय में प्रशासनिक कामकाज, राजकीय पत्राचार, राजस्व संबंधी व्यवहार और विभिन्न सरकारी अभिलेखों के लिए इस लिपि का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता था। इसलिए पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों के माध्यम से महाराष्ट्र के इतिहास को समझने के लिए मोडी लिपि का विशेष महत्व है। इसी ऐतिहासिक विरासत से विद्यार्थियों को परिचित कराने के लिए ठाणे के सतीश प्रधान ज्ञानसाधना महाविद्यालय में मोडी लिपि और महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर आधारित विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई। प्रदर्शनी में छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति संभाजी महाराज और छत्रपति राजाराम महाराज के कालखंड से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज विद्यार्थियों के लिए प्रदर्शित किए गए।
इस प्रदर्शनी में अभयपत्र, आज्ञापत्र, सनदपत्र, दानपत्र, वतनपत्र, जाबिता, जाहिरनामा और कौलनामा जैसे विभिन्न प्रकार के ऐतिहासिक दस्तावेज शामिल किए गए। इन दस्तावेजों के माध्यम से उस दौर की प्रशासनिक व्यवस्था, जमीन और राजस्व व्यवस्था, कर प्रणाली, राजनीतिक निर्णयों और शासन के कामकाज की जानकारी सामने आती है। प्रदर्शनी की खास बात यह रही कि विद्यार्थियों को इतिहास केवल पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से पढ़ने के बजाय वास्तविक ऐतिहासिक दस्तावेजों के जरिए समझने का अवसर मिला। मोडी लिपि के अक्षर, उसकी लेखन शैली और पुराने दस्तावेजों की संरचना को करीब से देखने से विद्यार्थियों में इस प्राचीन लिपि और इतिहास के प्रति जिज्ञासा बढ़ी।
मोडी लिपि का संरक्षण और उसका अध्ययन महाराष्ट्र की ऐतिहासिक विरासत की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। महाराष्ट्र सरकार के पुराभिलेख विभाग के पास मोडी लिपि में लिखे बड़ी संख्या में ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं। इन दस्तावेजों को पढ़ने और समझने के लिए मोडी लिपि के प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाती है। आज के डिजिटल दौर में युवा पीढ़ी पुराने हस्तलिखित दस्तावेजों और ऐतिहासिक अभिलेखों से काफी दूर होती जा रही है। ऐसे समय में इस तरह की प्रदर्शनियां विद्यार्थियों को अपनी ऐतिहासिक जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
शिवकालीन दस्तावेजों के माध्यम से तत्कालीन समाज व्यवस्था, प्रशासन, आर्थिक व्यवहार और शासन प्रणाली को समझने का अवसर मिलता है। विद्यार्थियों में मोडी लिपि के प्रति रुचि पैदा करना, महाराष्ट्र के इतिहास को लेकर जिज्ञासा बढ़ाना और पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण के प्रति जागरूकता निर्माण करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। इसी वजह से ठाणे में आयोजित यह प्रदर्शनी विद्यार्थियों के लिए इतिहास को करीब से समझने का एक अलग और ज्ञानवर्धक अनुभव साबित हुई।
