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अब स्कूल से शुरू होगी सड़क सुरक्षा की पढ़ाई' — नवी मुंबई ट्रैफिक पुलिस का बड़ा अभियान, हर बच्चे को बनाया जाएगा रोड सेफ्टी एम्बेसडर
नवी मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए 'Adopt a School' पहल शुरू की है। इस अभियान के तहत पुलिस अधिकारी स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को ट्रैफिक नियम, सड़क सुरक्षा, हेलमेट और सीट बेल्ट की अहमियत, पैदल सड़क पार करने के सुरक्षित तरीके और दुर्घटना से बचाव के उपाय सिखाएंगे। उद्देश्य है कि बच्चे स्वयं नियमों का पालन करें और अपने परिवार को भी सुरक्षित यातायात के लिए प्रेरित करें।
Kalpana Gautam15 जुल. 2026, 07:19 PM IST

स्कूलों से बदलेगी ट्रैफिक की तस्वीर, बच्चों के जरिए परिवारों तक पहुंचेगा सुरक्षा का संदेश
नवी मुंबई: सड़क हादसों में कमी लाने और आने वाली पीढ़ी में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नवी मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए 'Adopt a School' अभियान की शुरुआत की है।
इस पहल के तहत ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी नियमित रूप से विभिन्न स्कूलों का दौरा करेंगे और विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण देंगे। बच्चों को ट्रैफिक संकेतों की पहचान, ज़ेब्रा क्रॉसिंग का सही उपयोग, हेलमेट और सीट बेल्ट पहनने की अनिवार्यता, मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए वाहन चलाने के खतरे और सड़क पर जिम्मेदार व्यवहार की जानकारी दी जाएगी।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि सड़क सुरक्षा की शिक्षा बचपन से ही दी जाए तो भविष्य में नियमों का पालन करने वाले जिम्मेदार नागरिक तैयार होंगे। यही बच्चे अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को भी ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। यह सोच नवी मुंबई पुलिस के पहले चलाए गए छात्र-केंद्रित सड़क सुरक्षा अभियानों से भी मेल खाती है, जिनका उद्देश्य बच्चों के माध्यम से परिवारों तक जागरूकता पहुंचाना है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि केवल चालान और दंड से सड़क हादसों पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। दीर्घकालिक समाधान के लिए सड़क सुरक्षा को शिक्षा का हिस्सा बनाना आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों में जिम्मेदारी, अनुशासन और सुरक्षित यातायात की आदत विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि यह मॉडल सफल होता है, तो यह महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश के अन्य शहरों के लिए भी एक प्रभावी उदाहरण बन सकता है कि सड़क सुरक्षा की शुरुआत स्कूल की कक्षा से ही होनी चाहिए।
