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केंद्र सरकार ने पोषण ट्रैकर को बनाया मिशन पोषण 2.0 की रीढ़, ऑफलाइन सुविधा, फेस रिकग्निशन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से मजबूत हुई सेवा वितरण प्रणाली

महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार तथा आंगनवाड़ी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार लगातार डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ा रही है। इसी उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत ‘पोषण ट्रैकर’ (Poshan Tracker) डिजिटल एप्लिकेशन को एक आईसीटी (Information and Communication Technology-ICT) आधारित गवर्नेंस टूल के रूप में विकसित किया है। यह एप्लिकेशन देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों पर लाभार्थियों को दी जाने वाली सभी सेवाओं की डिजिटल निगरानी, समीक्षा और वास्तविक समय में मॉनिटरिंग की सुविधा प्रदान करता है।

Vindhya Dubey07 अग. 2026, 05:31 PM IST
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केंद्र सरकार ने पोषण ट्रैकर को बनाया मिशन पोषण 2.0 की रीढ़, ऑफलाइन सुविधा, फेस रिकग्निशन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से मजबूत हुई सेवा वितरण प्रणाली

सरकार का कहना है कि पोषण ट्रैकर के माध्यम से अब आंगनवाड़ी केंद्रों और घर-घर जाकर प्रदान की जाने वाली सेवाओं का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध हो रहा है। इससे केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी मिशन पोषण 2.0 के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करने और आवश्यकतानुसार समय पर सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिल रही है। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा बदलाव

मंत्रालय के अनुसार पोषण ट्रैकर ने पारंपरिक कागजी रिकॉर्ड प्रणाली की जगह आधुनिक डिजिटल व्यवस्था स्थापित की है। पहले लाभार्थियों की जानकारी, पोषण सेवाओं का रिकॉर्ड और वितरण संबंधी विवरण अलग-अलग रजिस्टरों में दर्ज किया जाता था, जिससे निगरानी और विश्लेषण में कठिनाई आती थी। अब यह पूरी प्रक्रिया मोबाइल आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित हो रही है। पोषण ट्रैकर के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों से जुड़ी जानकारी सीधे एप्लिकेशन में दर्ज करती हैं, जिससे डेटा तत्काल उपलब्ध हो जाता है और उसकी निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है।

नीति आयोग के अध्ययन में मिली डिजिटल व्यवस्था की पुष्टि

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2025 में नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) द्वारा मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 का परिणाम आधारित मूल्यांकन (Outcome-Based Evaluation) किया गया। अध्ययन में पाया गया कि पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन ने पोषण निगरानी, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (Early Childhood Care and Education-ECCE), लाभार्थियों के प्रमाणीकरण तथा सेवा वितरण की दक्षता में बहुआयामी सुधार किया है। रिपोर्ट के अनुसार पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत यह एप्लिकेशन कागजी व्यवस्था से तकनीक आधारित शासन प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतीक बन चुका है। अब लाभार्थियों, खाद्य सामग्री के भंडारण, वितरण और आंगनवाड़ी सेवाओं की निगरानी डिजिटल माध्यम से की जा रही है। नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया कि पोषण ट्रैकर ने अंतिम छोर तक सेवा वितरण (Last Mile Delivery) को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और कुशल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

लाभार्थियों की पहचान और सेवा वितरण हुआ अधिक पारदर्शी

पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचे। इसके लिए एप्लिकेशन में फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (Facial Recognition System-FRS) और ई-केवाईसी जैसी डिजिटल सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इन तकनीकों की सहायता से लाभार्थियों का प्रमाणीकरण किया जाता है, जिससे फर्जी लाभार्थियों की संभावना कम होती है और योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ती है। सरकार का कहना है कि इससे पूरक पोषण कार्यक्रम के क्रियान्वयन में जवाबदेही और दक्षता दोनों में सुधार हुआ है।

कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों के लिए ऑफलाइन सुविधा

देश के कई दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने पोषण ट्रैकर में ऑफलाइन कार्य करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई है।

यदि किसी क्षेत्र में इंटरनेट उपलब्ध नहीं है या नेटवर्क बहुत कमजोर है, तब भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लाभार्थियों का ई-केवाईसी और फेस मैचिंग प्रक्रिया ऑफलाइन मोड में पूरी कर सकती हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आधार आधारित फेस मैचिंग और ओटीपी आधारित ई-केवाईसी पूरी लाभार्थी जीवन-चक्र में केवल एक बार ही करना आवश्यक होता है। इससे लाभार्थियों को बार-बार प्रमाणीकरण की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता और सेवाएं प्राप्त करना आसान हो जाता है। ऑफलाइन मोड में दर्ज किए गए सभी रिकॉर्ड नेटवर्क उपलब्ध होने के बाद अधिकतम पांच दिनों के भीतर स्वतः सिंक्रोनाइज हो जाते हैं। इससे दूरदराज क्षेत्रों में भी आंगनवाड़ी सेवाओं की निरंतरता बनी रहती है।

टेक-होम राशन वितरण में भी डिजिटल निगरानी

सरकार ने बताया कि टेक-होम राशन (Take Home Ration-THR) के वितरण में भी फेसियल रिकग्निशन सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि राशन केवल उसी लाभार्थी को मिले जो पोषण ट्रैकर में पंजीकृत है। डिजिटल सत्यापन से वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हुई है और संभावित अनियमितताओं पर भी नियंत्रण संभव हुआ है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को लगातार दिया जा रहा प्रशिक्षण

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था को सफल बनाने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को लगातार प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन के रिसोर्स सेक्शन में प्रशिक्षण वीडियो, जागरूकता सामग्री और उपयोग संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता किसी भी समय देखकर अपनी जानकारी बढ़ा सकती हैं।

‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ पहल के तहत व्यापक प्रशिक्षण

मंत्रालय ने बताया कि ‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ (Poshan Bhi Padhai Bhi-PBPB) पहल के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस मॉडल में पहले जिला अधिकारियों, ब्लॉक समन्वयकों और पर्यवेक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है। इसके बाद यही प्रशिक्षक अपने-अपने क्षेत्रों की सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। प्रशिक्षण के दौरान फेसियल रिकग्निशन सिस्टम, जियो-टैगिंग, होम विजिट शेड्यूलर और पोषण ट्रैकर के अन्य डिजिटल मॉड्यूल का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। ब्लॉक और जिला स्तर के समन्वयक फील्ड में जाकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की तकनीकी समस्याओं का समाधान भी करते हैं।

रोजाना होती हैं वर्चुअल क्लास

डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC) की ओर से सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन दो ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाते हैं। दोपहर 3 बजे से 4 बजे तक आयोजित वर्चुअल क्लास में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एप्लिकेशन के संचालन से संबंधित अपने प्रश्न पूछ सकती हैं और विशेषज्ञों से तत्काल समाधान प्राप्त कर सकती हैं। इसके बाद शाम 4:15 बजे से 5:15 बजे तक राज्य स्तरीय अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए अलग प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाता है, जिसमें नई सुविधाओं, तकनीकी सुधारों और क्रियान्वयन संबंधी मुद्दों पर विस्तृत जानकारी दी जाती है।

डिजिटल तकनीक से मजबूत हो रही पोषण सेवाएं

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का कहना है कि पोषण ट्रैकर केवल एक मोबाइल एप्लिकेशन नहीं, बल्कि मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 की डिजिटल रीढ़ बन चुका है। डिजिटल निगरानी, वास्तविक समय में डेटा उपलब्धता, लाभार्थियों का सत्यापन, ऑफलाइन सुविधा, नियमित प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता के माध्यम से सरकार देशभर में आंगनवाड़ी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग से कुपोषण की पहचान, लाभार्थियों तक समय पर सेवाओं की पहुंच, योजनाओं की निगरानी और सेवा वितरण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे मिशन पोषण 2.0 के उद्देश्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकेगा।