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सलवार उतारने की कोशिश और सीना दबाने को दुष्कर्म का प्रयास न मानने वाले पटना HC के जस्टिस पूर्णेंदु सिंह के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर आरोपी को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर 2026 को पटना हाईकोर्ट के उस फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें महिला की सलवार उतारने की कोशिश और सीना दबाने के आरोपों को दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि फैसले में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां हैं और आरोपी को नोटिस जारी कर स्थानीय पुलिस से उसकी तामील कराने का निर्देश दिया।

Sonali27 सित. 2026, 03:17 PM IST
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सलवार उतारने की कोशिश और सीना दबाने को दुष्कर्म का प्रयास न मानने वाले पटना HC के जस्टिस पूर्णेंदु सिंह के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर आरोपी को नोटिस


नई दिल्ली।

पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर 2026 को महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसमें महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाकर शारीरिक छेड़छाड़ करने के आरोपों को भारतीय दंड संहिता की धारा 376/511 के तहत दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में कुछ टिप्पणियां आपत्तिजनक हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 23 सितंबर को मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने बिहार के महाधिवक्ता एसडी संजय से कहा कि फैसले में कुछ “आपत्तिजनक टिप्पणियां” हैं। हालांकि, पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी को सुनवाई का अवसर दिए बिना हाईकोर्ट के आदेश को रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्थानीय पुलिस के माध्यम से आरोपी को नोटिस की तामील सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।


क्या था पटना हाईकोर्ट का फैसला?

मामला वर्ष 2008 की घटना से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, एक महिला अपने पिता के साथ बांका जिले के अमरपुर स्थित एक फोटो स्टूडियो गई थी। आरोप था कि फोटो स्टूडियो संचालक ने उसके पिता को बाहर भेजकर कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। इसके बाद उसने महिला की सलवार उतारने की कोशिश की और उसके सीने को दबाकर उसके साथ शारीरिक छेड़छाड़ की। महिला के विरोध और शोर मचाने के बाद आरोपी वहां से भाग गया। मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 सहपठित धारा 511 और धारा 342 के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद आरोपी ने पटना हाईकोर्ट में अपील की। 9 जुलाई 2026 को पटना हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आरोपी की अपील स्वीकार करते हुए दुष्कर्म के प्रयास की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा था कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे दुष्कर्म करने का स्पष्ट और निर्णायक प्रयास या ऐसा प्रत्यक्ष कृत्य साबित हो, जो आरोपी की दुष्कर्म करने की मंशा को निर्विवाद रूप से स्थापित करता हो। हाईकोर्ट ने माना था कि आरोप अधिकतम भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत महिला की लज्जा भंग करने के अपराध का मामला बनाते हैं।


सुप्रीम कोर्ट के सामने मामला जुलाई में ही उठा था

महत्वपूर्ण बात यह है कि पटना हाईकोर्ट का यह फैसला पहली बार 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के सामने नहीं आया। जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की इसी पीठ के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता और एचएस फूलका ने पटना हाईकोर्ट के फैसले का उल्लेख किया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अन्य फैसले से संबंधित स्वतः संज्ञान मामले पर सुनवाई कर रहा था। उस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के स्तन दबाने, पायजामे की डोरी तोड़ने और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश से जुड़े कृत्यों को दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना था। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में उस फैसले को रद्द कर दिया था।


इलाहाबाद हाईकोर्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के फरवरी 2026 के फैसले में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश से संबंधित स्वतः संज्ञान मामले पर फैसला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित हाईकोर्ट आदेश को रद्द करते हुए यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक भाषा और दृष्टिकोण में संवेदनशीलता पर जोर दिया था। इसी पृष्ठभूमि में जुलाई में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बावजूद पटना हाईकोर्ट ने समान प्रकृति के तथ्यों वाले मामले में ऐसा ही कानूनी दृष्टिकोण अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अब पटना हाईकोर्ट के फैसले को लेकर अलग से स्वतः संज्ञान कार्यवाही शुरू की है।


23 सितंबर की सुनवाई में क्या हुआ?

ताजा सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अभी पटना हाईकोर्ट के फैसले को रद्द नहीं किया है। पीठ ने स्पष्ट किया कि आरोपी को सुने बिना ऐसा आदेश पारित नहीं किया जा सकता। इसलिए आरोपी को नोटिस जारी कर उसकी तामील स्थानीय पुलिस के जरिए कराने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद पक्षकारों को सुनकर सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई करेगा।