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कोपर्डी गैंगरेप-मर्डर केस में बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा कदम, अंतिम दलीलों से पहले घटनास्थल का दौरा करेंगे जज

2016 के चर्चित कोपर्डी गैंगरेप और मर्डर मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतिम दलीलों की सुनवाई से पहले घटनास्थल का दौरा करने का फैसला किया है। न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति आशीष चव्हाण की पीठ डेथ रेफरेंस और दोषियों की अपीलों पर अंतिम सुनवाई से पहले घटना स्थल का निरीक्षण करेगी। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने तीन दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी।

Sonali27 सित. 2026, 04:31 PM IST
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कोपर्डी गैंगरेप-मर्डर केस में बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा कदम, अंतिम दलीलों से पहले घटनास्थल का दौरा करेंगे जज

मुंबई।

 महाराष्ट्र के चर्चित कोपर्डी गैंगरेप और मर्डर मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतिम दलीलों की सुनवाई से पहले घटनास्थल का दौरा करने का फैसला किया है। न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति आशीष चव्हाण की खंडपीठ ने 22 सितंबर 2026 को कहा कि वह उस स्थान का निरीक्षण करेगी, जहां वर्ष 2016 में नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना हुई थी। यह मामला फिलहाल हाईकोर्ट के समक्ष डेथ रेफरेंस और दोषियों की ओर से दायर अपीलों के स्तर पर है। ट्रायल कोर्ट ने मामले में तीनों दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट को यह तय करना है कि मौत की सजा की पुष्टि की जाए या मामले में कोई अन्य आदेश पारित किया जाए। कोर्ट का घटनास्थल का दौरा करने का निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतिम दलीलों की सुनवाई से पहले पीठ मामले से जुड़े भौतिक तथ्यों और घटनास्थल की परिस्थितियों को स्वयं देखना चाहती है। इसके बाद मामले में अंतिम दलीलों पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।

2016 में हुई थी वारदात

कोपर्डी गांव, तत्कालीन अहमदनगर जिले में 13 जुलाई 2016 को एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना हुई थी। पुलिस के अनुसार, लड़की शाम के समय अपने दादा के घर से साइकिल से लौट रही थी, तभी उसे रोका गया और उसके साथ अपराध किया गया। बाद में उसकी हत्या कर दी गई। मामले की जांच के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने लगभग 350 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 31 गवाहों की जांच की और बड़ी संख्या में साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित करने की दलील दी थी। 

तीनों दोषियों को मिली थी मौत की सजा

अहमदनगर जिला एवं सत्र अदालत ने नवंबर 2017 में जितेंद्र बाबूलाल शिंदे उर्फ पप्पू, संतोष गोरख भवाळ और नितिन गोपीनाथ भैलुमे को मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद अदालत ने तीनों को मौत की सजा सुनाई थी। फैसले में दुष्कर्म, हत्या और आपराधिक साजिश से जुड़े अपराधों के तहत दोषसिद्धि हुई थी।  मामले में पॉक्सो कानून की धाराएं भी लगाई गई थीं। घटना के बाद महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे और मामले ने व्यापक सार्वजनिक एवं कानूनी चर्चा को जन्म दिया था। 

हाईकोर्ट में अब क्या होगा?

ट्रायल कोर्ट की मौत की सजा के बाद मामला हाईकोर्ट के समक्ष डेथ रेफरेंस के रूप में आया। दोषियों ने भी अपनी सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए अपीलें दायर की हैं। अब अंतिम दलीलों से पहले घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद हाईकोर्ट मामले के रिकॉर्ड, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगा। घटनास्थल का दौरा अपने आप में दोषसिद्धि या सजा की पुष्टि का संकेत नहीं है; अंतिम निर्णय हाईकोर्ट द्वारा मामले की पूरी न्यायिक समीक्षा के बाद लिया जाएगा।