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गैंगरेप के बाद खुली दिल्ली के पार्कों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल
आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से कथित सामूहिक दुष्कर्म के बाद दिल्ली के पार्कों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। हालिया ग्राउंड रिपोर्टों में कई पार्कों में अंधेरे हिस्से, कम निगरानी, खुले या कमजोर प्रवेश बिंदु और CCTV की कमी सामने आई। प्रशासन ने अब व्यापक सुरक्षा ऑडिट और अतिरिक्त पेट्रोलिंग के निर्देश दिए हैं।

नई दिल्ली। दिल्ली के पार्क दिन में भले ही लोगों के लिए सुकून और खुलेपन की जगह हों, लेकिन सूरज ढलने के बाद कई पार्कों की सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर बदल जाती है। आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद राजधानी के पार्कों में रोशनी, सुरक्षा गार्ड, CCTV और पेट्रोलिंग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।
हालिया ग्राउंड रिपोर्टों में बुद्धा जयंती पार्क, स्वर्ण जयंती पार्क, विजय मंडल पार्क और शीश महल पार्क समेत कई स्थानों पर अलग-अलग तरह की सुरक्षा कमियां दर्ज की गईं। कुछ हिस्सों में रोशनी कम थी, जबकि बड़े और घने पार्कों के अंदरूनी हिस्सों में गार्ड या निगरानी आसानी से नजर नहीं आई। कुछ जगहों पर लोग मोबाइल की फ्लैशलाइट के सहारे चलते दिखे।
आस्था कुंज पार्क में स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय बनी। 142 एकड़ में फैले इस पार्क में सात प्रवेश बिंदु बताए गए हैं। एक मौके की जांच में कुछ गेटों पर सीमित सुरक्षा दिखाई दी, जबकि DDA का कहना है कि पार्क में 27 गार्ड तीन शिफ्ट में तैनात हैं और हर समय कम से कम नौ गार्ड होने चाहिए। पार्क के एक गार्ड ने बताया कि अलग-थलग और कम रोशनी वाले हिस्सों में बैठने वाले युवा कपल्स को वहां से हटाना भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। हालांकि, इसे किसी आधिकारिक “कपल्स के लिए प्रतिबंध” के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज की है। दिल्ली पुलिस ने पार्कों और दूसरे संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ाने को कहा है। वहीं दिल्ली के उपराज्यपाल ने सभी पार्कों का सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। समीक्षा में रोशनी, CCTV, सुरक्षा गार्ड, पेट्रोलिंग और साफ-सफाई को शामिल किया गया है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार करीब 1,500 पार्कों का निरीक्षण किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि समस्या केवल एक पार्क तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े सार्वजनिक हरित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी की जरूरत है।
अब चुनौती यह है कि ऑडिट में सामने आई कमियों को सिर्फ रिपोर्ट तक सीमित न रखकर रोशनी, CCTV, गार्ड और नियमित पेट्रोलिंग के स्तर पर स्थायी सुधार में बदला जाए।
