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अक्टूबर में बढ़ सकता है रेपो रेट, होम लोन की EMI पर क्या होगा असर?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अक्टूबर में होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) बैठक से पहले रेपो रेट बढ़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। कई अर्थशास्त्रियों और रिसर्च रिपोर्ट्स में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। अगर RBI दर बढ़ाता है तो फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन ग्राहकों की EMI या लोन की अवधि पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अभी RBI की ओर से दर बढ़ाने का कोई फैसला नहीं हुआ है।

भारतीय रिजर्व बैंक की अगली मॉनेटरी पॉलिसी बैठक से पहले ब्याज दरों को लेकर बाजार में हलचल बढ़ गई है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, कई अर्थशास्त्री अक्टूबर में RBI द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना जता रहे हैं। Reuters की 28 सितंबर की रिपोर्ट में भी अधिकांश सर्वे किए गए अर्थशास्त्रियों ने अक्टूबर में दर बढ़ने का अनुमान लगाया है।
अभी रेपो रेट 5.25% पर है। RBI की MPC की अगली बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच होने वाली है। ऐसे में 7 अक्टूबर को आने वाला फैसला कर्ज लेने वालों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
क्यों बढ़ रही है रेट हाइक की चर्चा?
रेट बढ़ने की आशंका के पीछे महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जैसे कारण बताए जा रहे हैं। हाल की रिपोर्टों में अगस्त की खुदरा महंगाई 4.82% तक पहुंचने का उल्लेख है। वहीं, वैश्विक स्तर पर भी ब्याज दरों और ऊर्जा कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। SBI Research ने अक्टूबर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान जताया है। इसके बाद दिसंबर में भी इतनी ही बढ़ोतरी की संभावना बताई गई है। हालांकि यह RBI का संकेत नहीं, बल्कि SBI Research का अनुमान है।
क्या आपकी होम लोन EMI बढ़ जाएगी?
अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो इसका असर खास तौर पर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिनके होम लोन की ब्याज दर फ्लोटिंग या बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी है। बैंक अपने लेंडिंग रेट में बदलाव करते हैं तो ग्राहक की मासिक EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होते ही हर होम लोन ग्राहक की EMI ठीक 25 बेसिस पॉइंट के अनुपात में बढ़ जाएगी। वास्तविक असर बैंक, लोन के बेंचमार्क, रीसेट नियम और ग्राहक की बाकी शर्तों पर निर्भर करेगा।
मसलन, बैंक के पास EMI बढ़ाने के बजाय लोन की अवधि बढ़ाने का विकल्प भी हो सकता है। इसलिए किसी ग्राहक पर कितना अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, यह उसके बकाया लोन, ब्याज दर और शेष अवधि पर निर्भर करेगा।
