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महँगाई और वैश्विक तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अक्टूबर 2026 की बुलेटिन के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र की गतिविधियों और निर्यात में वृद्धि से आर्थिक विकास को समर्थन मिल रहा है।

मुंबई: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती बनाए हुए है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अक्टूबर बुलेटिन के अनुसार, घरेलू मांग, उद्योग और सेवा क्षेत्र की गतिविधियाँ तथा निर्यात में वृद्धि देश की आर्थिक स्थिति को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और महँगाई से जुड़े जोखिम अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियाँ पैदा कर रहे हैं।
घरेलू मांग बनी आर्थिक विकास का प्रमुख आधार
RBI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था को घरेलू खपत और सेवा क्षेत्र की मजबूती से लगातार समर्थन मिल रहा है। उद्योग और सेवाओं से जुड़े विभिन्न आर्थिक संकेतक गतिविधियों में मजबूती दर्शाते हैं। घरेलू मांग मजबूत रहने से कारोबार, उत्पादन और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है। यही कारण है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी विकास गति बनाए रखी है।
IMF ने भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाया
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। पहले यह अनुमान 6.4 प्रतिशत था। IMF के अनुसार, उम्मीद से बेहतर आर्थिक गतिविधियों, मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र के अच्छे प्रदर्शन ने इस संशोधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को दर्शाता है, हालांकि वास्तविक विकास दर आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
निर्यात में वृद्धि से व्यापार घाटे को राहत
RBI की अक्टूबर बुलेटिन के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भारत के वस्तु निर्यात में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। इससे व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिली। इसके अलावा, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI), बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशों से आने वाले धन (Remittances) में मजबूती ने देश के बाहरी आर्थिक क्षेत्र को समर्थन दिया। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार भी वैश्विक आर्थिक झटकों से निपटने में सहायक है।
महँगाई और कच्चे तेल की कीमतें बनीं चुनौती
अर्थव्यवस्था की मजबूती के बावजूद महँगाई को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं। सितंबर 2026 में भारत की खुदरा महँगाई दर बढ़कर लगभग 5.54 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त में यह 4.82 प्रतिशत थी। खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने महँगाई पर दबाव बढ़ाया है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर भी असर पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, मौसम संबंधी अनिश्चितता और अल नीनो की परिस्थितियाँ कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं। इन कारणों से आने वाले महीनों में महँगाई पर नियंत्रण बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आगे की राह
RBI की रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, लेकिन साथ ही वैश्विक जोखिमों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता भी बताती है। मजबूत घरेलू मांग, निर्यात, सेवा क्षेत्र और विदेशी निवेश आर्थिक विकास को समर्थन दे सकते हैं। दूसरी ओर, महँगाई, ऊर्जा की बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय तनाव विकास की गति को प्रभावित कर सकते हैं।भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों के बीच अपनी मजबूती प्रदर्शित की है। आने वाले समय में आर्थिक विकास को बनाए रखने के साथ महँगाई पर नियंत्रण करना सरकार और RBI के लिए महत्वपूर्ण प्राथमिकता होगी।
