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6 साल की बच्ची से यौन शोषण के आरोपी को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार, जस्टिस मिलिंद जाधव बोले- ‘भरोसा पूरी तरह टूट गया’
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 साल की बच्ची से यौन शोषण के आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि आरोपी ने पड़ोसी और बच्ची के बीच पिता-बेटी जैसे रिश्ते में बने भरोसे को पूरी तरह खत्म कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले में जमानत देना समाज में गलत संदेश भेज सकता है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 साल की बच्ची से यौन शोषण के आरोपी 40 वर्षीय व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस मिलिंद जाधव ने कहा कि आरोपी पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं और उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत मामला बनता है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने बच्ची और उसके परिवार द्वारा उस पर किए गए भरोसे को पूरी तरह खत्म कर दिया। मामला पुणे का है, जहां आरोपी पड़ोस में रहने वाली नाबालिग बच्ची के परिवार के साथ अच्छे संबंध रखता था। बच्ची आरोपी को ‘अतुल नाना’ कहकर बुलाती थी, जिसका अर्थ पिता के समान व्यक्ति होता है। बच्ची अक्सर आरोपी के घर भी जाती थी। अदालत के सामने रखे गए रिकॉर्ड के अनुसार, घटना का खुलासा तब हुआ जब बच्ची पड़ोस की एक अन्य बच्ची के साथ घर में खेल रही थी और उसने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। बच्ची की मां ने उसे दरवाजा बंद करने के लिए डांटा, जिसके बाद बच्ची ने बताया कि आरोपी अक्सर उसे अपने घर बुलाता था और उसकी जांघों पर चोट लगी है या नहीं, यह देखने के बहाने उसके निजी अंगों को छूता था। इसके बाद बच्ची की मां ने अपने पति और परिवार के अन्य सदस्यों को जानकारी दी और आरोपी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया।
आरोपी ने जमानत याचिका में दावा किया कि पड़ोसी परिवारों के बीच विवाद के कारण उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। उसने यह भी बताया कि वह करीब 3 साल 3 महीने से जेल में है। हालांकि, जस्टिस मिलिंद जाधव ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में लंबे समय तक जेल में रहने और मुकदमे में देरी को देखते हुए अदालत जमानत पर विचार कर सकती है, लेकिन मौजूदा मामला अपवाद है। अदालत ने कहा कि आरोपी के प्रति बच्ची के परिवार ने जिस विश्वास के साथ उसे अपने घर आने-जाने दिया, वह पूरी तरह टूट गया है। कोर्ट ने कहा कि 6 साल की बच्ची और 40 वर्षीय आरोपी के बीच ऐसा संबंध था, जिसमें आरोपी को बच्ची के लिए पिता जैसी भूमिका वाला व्यक्ति माना जाता था। अदालत के अनुसार, इस विश्वास का दुरुपयोग कर बच्ची के साथ कथित यौन शोषण करना गंभीर प्रकृति का कृत्य है। जस्टिस जाधव ने कहा कि ऐसे मामले में जमानत देना समाज में गलत संदेश भेज सकता है। अदालत ने यह भी माना कि कथित घटना ने बच्ची के कोमल मन पर गंभीर प्रभाव डाला होगा। कोर्ट ने कहा कि POCSO कानून का एक प्रमुख उद्देश्य बच्चों की कम उम्र को देखते हुए उन्हें यौन शोषण और किसी भी प्रकार के शोषण से बचाना तथा उनके बचपन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इन टिप्पणियों के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला ‘A बनाम महाराष्ट्र राज्य’, बेल एप्लीकेशन नंबर 3403/2026 है।
