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महिलाओं की सुरक्षा: अनिवार्य ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन के बिना सार्वजनिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने मांगा महाराष्ट्र सरकार से जवाब
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में Vehicle Location Tracking Device (VLTD) और Panic Button (आपातकालीन बटन) के बिना सार्वजनिक सेवा वाहनों के रजिस्ट्रेशन को लेकर दायर याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि RTO द्वारा बस, कैब और ऑटोरिक्शा जैसे सार्वजनिक वाहनों को अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों के बिना भी पंजीकृत किया जा रहा है, जिससे खासकर महिलाओं की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में सार्वजनिक परिवहन वाहनों में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट के समक्ष दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि Regional Transport Offices (RTOs) ऐसे सार्वजनिक सेवा वाहनों का भी रजिस्ट्रेशन और अप्रूवल कर रहे हैं, जिनमें अनिवार्य Vehicle Location Tracking Device (वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस) और Panic Button (आपातकालीन बटन) लगाए नहीं गए हैं। याचिका में बस, टैक्सी, कैब और ऑटोरिक्शा सहित सार्वजनिक सेवा वाहनों का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन वाहनों में यात्रियों, विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा के लिए निर्धारित तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था का होना जरूरी है। इसके बावजूद यदि बिना इन उपकरणों के वाहनों को सड़क पर चलने की अनुमति दी जाती है, तो सुरक्षा संबंधी नियमों का उद्देश्य प्रभावित होता है।
RTO के रजिस्ट्रेशन पर उठे सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि महाराष्ट्र के विभिन्न RTO (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) कथित तौर पर ऐसे सार्वजनिक वाहनों को रजिस्टर कर रहे हैं, जिनमें Vehicle Location Tracking Device (वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस) और Panic Button (आपातकालीन बटन) मौजूद नहीं हैं। VLTD (वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस) का उद्देश्य वाहन की लोकेशन को ट्रैक करने में सहायता करना है। वहीं Panic Button (आपातकालीन बटन) यात्रियों, विशेषकर महिलाओं के लिए आपात स्थिति में मदद मांगने का माध्यम है। ऐसे उपकरणों का उद्देश्य किसी घटना की स्थिति में वाहन की पहचान और लोकेशन का पता लगाने तथा संबंधित अधिकारियों तक सूचना पहुंचाने में सहायता करना है। याचिका में कहा गया है कि इन सुरक्षा उपायों को लागू करने का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करने वाली महिलाओं और अन्य यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना है। यदि निर्धारित उपकरणों के बिना वाहन पंजीकृत किए जाते हैं, तो इन सुरक्षा प्रावधानों का प्रभाव कम हो सकता है।
कोर्ट ने राज्य से मांगा जवाब
बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका में उठाए गए आरोपों पर महाराष्ट्र सरकार का पक्ष जानना जरूरी समझा है। कोर्ट ने राज्य से जवाब दाखिल करने को कहा है। फिलहाल अदालत ने याचिका में लगाए गए आरोपों को अंतिम रूप से सही नहीं माना है और मामले में सरकार के जवाब के बाद आगे सुनवाई होगी। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर वाहनों की निगरानी, लोकेशन ट्रैकिंग और आपातकालीन सहायता व्यवस्था को महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय माना जा रहा है।
याचिका में मुख्य रूप से यह सवाल उठाया गया है कि यदि VLTD और Panic Button (आपातकालीन बटन) अनिवार्य सुरक्षा मानकों का हिस्सा हैं, तो इनके बिना सार्वजनिक सेवा वाहनों का रजिस्ट्रेशन कैसे किया जा रहा है और ऐसे वाहनों के खिलाफ संबंधित परिवहन अधिकारियों द्वारा क्या कार्रवाई की जा रही है। हाईकोर्ट के समक्ष अब राज्य सरकार का जवाब महत्वपूर्ण होगा, जिसके बाद अदालत इस मामले में आगे के निर्देशों पर विचार कर सकती है।
