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हर हाथ बने जीवनरक्षक! श्रीनगर और बेंगलुरु में CPR ट्रेनिंग से मजबूत हो रहा फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क
श्रीनगर और बेंगलुरु में आम नागरिकों, ऑटो ड्राइवरों और पुलिसकर्मियों को CPR की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसका उद्देश्य अचानक कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में मेडिकल मदद पहुंचने से पहले लोगों को तुरंत जीवनरक्षक सहायता देने में सक्षम बनाना है।

नई दिल्ली: अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट के मामलों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में एम्बुलेंस या डॉक्टर के पहुंचने से पहले अगर आसपास मौजूद व्यक्ति CPR देना जानता हो, तो मरीज को बचाने की संभावना बढ़ सकती है। इसी उद्देश्य से श्रीनगर और बेंगलुरु में आम नागरिकों को CPR की ट्रेनिंग देने की पहल तेज हो रही है।
आम लोगों को दी जा रही CPR ट्रेनिंग
श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) के तहत चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में स्कूलों, जिम, ट्रेकिंग समुदाय, ट्रैफिक पुलिस और अन्य लोगों को CPR सिखाया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों की संख्या बढ़ाना है जो किसी आपात स्थिति में मेडिकल टीम के पहुंचने तक तुरंत मदद कर सकें। बेंगलुरु में भी ऑटो ड्राइवरों, ट्रैफिक पुलिस और समुदाय के अन्य सदस्यों को CPR का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शहर में पहले भी लगभग 200 ऑटो ड्राइवरों को CPR ट्रेनिंग दी जा चुकी है, ताकि वे सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली मेडिकल इमरजेंसी में शुरुआती सहायता दे सकें।
CPR क्यों है जरूरी?
कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक प्रभावी तरीके से रक्त पंप करना बंद कर देता है। इससे मस्तिष्क और शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचना रुक जाता है।ऐसे समय में CPR यानी Cardiopulmonary Resuscitation छाती पर लगातार दबाव देकर रक्त संचार बनाए रखने में मदद करता है। इससे प्रोफेशनल मेडिकल सहायता पहुंचने तक मरीज के लिए महत्वपूर्ण समय मिल सकता है।
‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की बढ़ रही भूमिका
ट्रैफिक पुलिस, ऑटो ड्राइवर, ट्रेकिंग गाइड और जिम प्रशिक्षक जैसे लोग अक्सर घटनास्थल पर जल्दी पहुंच सकते हैं। इसलिए इन्हें CPR की ट्रेनिंग देने से अस्पताल पहुंचने से पहले की महत्वपूर्ण अवधि में मदद मिल सकती है।
बेंगलुरु के एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने बताया कि पुलिस अक्सर दुर्घटना स्थल पर एम्बुलेंस से पहले पहुंचती है, इसलिए CPR जैसी जीवनरक्षक तकनीक सीखना जरूरी है।
जागरूकता से बदल सकती है तस्वीर
रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि CPR को केवल डॉक्टरों या स्वास्थ्यकर्मियों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। आम नागरिकों को भी इसकी बुनियादी जानकारी होनी चाहिए, ताकि अचानक कार्डियक अरेस्ट होने पर लोग घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई कर सकें।
श्रीनगर और बेंगलुरु की ये पहल एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—CPR की जानकारी केवल एक कौशल नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी बचाने की क्षमता है।
