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विदेशों में भारतीय चावल की मांग बढ़ी, कमाई ₹45 हजार करोड़ के पार, 12.9% की बढ़ोतरी
भारत के चावल निर्यात से होने वाली कमाई में अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान सालाना आधार पर 12.9% की वृद्धि दर्ज की गई और यह ₹45,739 करोड़ पर पहुंच गई। बासमती चावल से निर्यात आय 11.6% बढ़कर ₹22,864 करोड़ रही, जबकि गैर-बासमती चावल से कमाई 14.2% बढ़कर ₹22,874 करोड़ हो गई। निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय मांग, व्यापार नीतियां और परिवहन लागत आने वाले महीनों में अहम कारक रहेंगे।

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: भारत के चावल निर्यात से होने वाली कमाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान चावल निर्यात से प्राप्त आय सालाना आधार पर 12.9 प्रतिशत बढ़कर 45,739 करोड़ रुपये हो गई। बासमती और गैर-बासमती, दोनों तरह के चावल के निर्यात से कमाई में वृद्धि हुई। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-अगस्त 2025 की तुलना में इस अवधि में बासमती चावल के निर्यात से होने वाली आय 11.6 प्रतिशत बढ़कर 22,864 करोड़ रुपये रही। वहीं, गैर-बासमती चावल के निर्यात से कमाई 14.2 प्रतिशत बढ़कर 22,874 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
गैर-बासमती चावल के निर्यात में अधिक वृद्धि
निर्यात से होने वाली कमाई में गैर-बासमती चावल ने अपेक्षाकृत तेज वृद्धि दर्ज की। इस श्रेणी में 14.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि बासमती चावल से होने वाली आय 11.6 प्रतिशत बढ़ी। दोनों श्रेणियों ने भारत की कुल चावल निर्यात आय में लगभग बराबर योगदान दिया। हालांकि, निर्यात आय में वृद्धि का अर्थ यह जरूरी नहीं है कि चावल की निर्यात मात्रा भी उसी अनुपात में बढ़ी हो। ये आंकड़े रुपये में निर्यात से प्राप्त कुल मूल्य को दर्शाते हैं।
निर्यात बढ़ाने के लिए स्थिर नीतियों पर जोर
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ ने निर्यात की इस वृद्धि को बनाए रखने के लिए स्थिर व्यापार नीतियों, निर्यात प्रोत्साहनों तक आसान पहुंच और नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर अवसरों की जरूरत पर जोर दिया है। निर्यातकों के लिए माल ढुलाई की लागत, दूसरे देशों के आयात नियम और व्यापार समझौतों के तहत मिलने वाली सुविधाएं भी महत्वपूर्ण हैं। नीतियों में अचानक बदलाव होने पर निर्यातकों की लागत और विदेशी खरीदारों के साथ किए गए कारोबारी समझौतों पर असर पड़ सकता है।
भारत अंतरराष्ट्रीय चावल बाजार में स्थिति मजबूत करने की तैयारी में
भारत दुनिया के प्रमुख चावल निर्यातक देशों में शामिल है। बासमती चावल की अंतरराष्ट्रीय मांग के साथ-साथ एशिया और अफ्रीका के बाजारों में गैर-बासमती चावल की मांग भी भारतीय निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है। इसी संदर्भ में भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC) 2026 का आयोजन 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रस्तावित है। सम्मेलन में निर्यात नीतियों, व्यापार समझौतों, प्रोत्साहनों और नए बाजारों में कारोबार बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की जाएगी।
उत्पादन में संभावित गिरावट के बीच निर्यात पर नजर
चावल निर्यात के सकारात्मक आंकड़ों के बीच उत्पादन को लेकर भी चुनौतियां बनी हुई हैं। प्रतिकूल मौसम के कारण 2026-27 में भारत के चावल उत्पादन में गिरावट का अनुमान जताया गया है। हालांकि, भारतीय चावल निर्यातक महासंघ के अनुसार, सरकारी चावल भंडार पर्याप्त होने से घरेलू खाद्य सुरक्षा और निर्यात आपूर्ति को सहारा मिल सकता है।
कुल मिलाकर, अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान चावल निर्यात से होने वाली कमाई में वृद्धि भारतीय कृषि व्यापार के लिए सकारात्मक संकेत है। आने वाले महीनों में निर्यात की रफ्तार बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय मांग, व्यापार नीतियों, उत्पादन और परिवहन लागत की भूमिका अहम रहेगी।
