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शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 536 अंक टूटा और निफ्टी में भी कमजोरी
26 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 536.30 अंक गिरकर 72,583.86 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 200.10 अंक टूटकर 22,402.80 पर आ गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले अनिश्चितता और आईटी शेयरों में बिकवाली बाजार में कमजोरी के प्रमुख कारण रहे।

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों का रुझान कमजोर रहा। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 536 अंक से अधिक गिर गया, जबकि एनएसई निफ्टी में भी 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ गई। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर भी बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट आई?
सरकारी समाचार सेवा डीडी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 536.30 अंक गिरकर 72,583.86 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 200.10 अंक टूटकर 22,402.80 के स्तर पर आ गया।
शुरुआती कारोबार में बाजार पर बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। हालांकि, शेयर बाजार के सूचकांकों में उतार-चढ़ाव के कारण कारोबार के दौरान इनके स्तर बदल सकते हैं।
शेयर बाजार में गिरावट के 4 प्रमुख कारण
1. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से बढ़ी चिंता
भारतीय शेयर बाजार पर दबाव का एक प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे महंगाई पर दबाव पड़ने और कंपनियों की उत्पादन तथा परिवहन लागत बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर विमानन, परिवहन, पेंट और अन्य तेल-आधारित उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
2. मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
मध्य पूर्व में जारी तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ाई हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के समय निवेशक अक्सर जोखिम वाले निवेशों को लेकर सतर्क हो जाते हैं। इससे शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ सकती है।
3. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर निवेशकों की नजर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली मौद्रिक नीति बैठक भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। निवेशक यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों और भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर क्या संकेत देता है। यदि अमेरिकी ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी बॉन्ड और डॉलर आधारित निवेश आकर्षक हो सकते हैं। इससे भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।
4. आईटी शेयरों में बिकवाली
सोमवार के शुरुआती कारोबार में सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी क्षेत्र के शेयरों में भी कमजोरी देखी गई। इन्फोसिस के शेयरों पर विशेष दबाव रहा। कंपनी द्वारा वार्षिक राजस्व वृद्धि के अनुमान में कटौती किए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी। आईटी कंपनियों के कारोबार पर अमेरिकी बाजार की मांग, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ग्राहकों के खर्च का प्रभाव पड़ता है। इसलिए अमेरिका में मांग कमजोर होने की आशंका भारतीय आईटी शेयरों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।
किन कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही?
डीडी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर दबाव में रहे। दूसरी ओर, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, अडानी पोर्ट्स और एक्सिस बैंक के शेयरों में मजबूती दिखाई दी। इससे स्पष्ट होता है कि बाजार में गिरावट के बावजूद सभी कंपनियों के शेयर एक ही दिशा में नहीं चले।
क्या शेयर बाजार में गिरावट से आम लोगों पर असर पड़ सकता है?
म्यूचुअल फंड निवेशक: शेयर बाजार से जुड़े इक्विटी म्यूचुअल फंड के मूल्य में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव हो सकता है।
पेट्रोल और डीजल: कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने से ईंधन की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
महंगाई: आयात महंगा होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका रहती है।
विदेशी निवेश: वैश्विक ब्याज दरों और भू-राजनीतिक घटनाओं से विदेशी निवेशकों के फैसले प्रभावित हो सकते हैं।
कंपनियों का मुनाफा: बढ़ती लागत और कमजोर मांग कुछ कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल सकती है।
हालांकि, शेयर बाजार में एक दिन की गिरावट से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अर्थव्यवस्था में लंबे समय तक कमजोरी बनी रहेगी।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय नतीजों, कारोबार की स्थिति और जोखिमों का मूल्यांकन करना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम सहने की क्षमता के अनुसार निर्णय लेना चाहिए। केवल बाजार में गिरावट देखकर घबराहट में शेयर बेचना या बिना पर्याप्त जानकारी के नया निवेश करना उचित नहीं है। निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना भी उपयोगी हो सकता है।
26 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मध्य पूर्व का तनाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक और आईटी शेयरों में बिकवाली इसके प्रमुख कारणों में शामिल रहे।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश के प्रवाह और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। इन्हीं कारकों से बाजार की आगे की दिशा प्रभावित हो सकती है।
