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डोंबिवली शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट का आरोप, 5 आरोपियों पर गंभीर धाराओं में चार्ज फ्रेम; 11 सितंबर को कोर्ट ने तय किए आरोप

6 जुलाई 2026 की रात डोंबिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट, धमकी और अभद्रता के मामले में कल्याण कोर्ट ने 11 सितंबर 2026 को पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए। आरोपियों पर डॉक्टरों से मारपीट, महिला डॉक्टर की गरिमा भंग करने, आपराधिक धमकी, गैरकानूनी जमावड़े और सरकारी अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपियों ने सभी आरोपों से इनकार किया है।

Sonali26 सित. 2026, 02:12 PM IST
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डोंबिवली शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट का आरोप, 5 आरोपियों पर गंभीर धाराओं में चार्ज फ्रेम; 11 सितंबर को कोर्ट ने तय किए आरोप

डोंबिवली पश्चिम के शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट, गाली-गलौज, धमकी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में कल्याण कोर्ट ने पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोर्ट नंबर 3, कल्याण के न्यायाधीश निलेश पी. वसाडे ने 11 सितंबर 2026 को आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस एक्ट और महाराष्ट्र पुलिस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत चार्ज फ्रेम किए। मामला 6 जुलाई 2026 की रात करीब 8 से 9 बजे का है। आरोप के मुताबिक, शास्त्रीनगर अस्पताल, डोंबिवली पश्चिम के ओपीडी के प्रथम तल स्थित लेबर-2 वार्ड में आरोपी एक गैरकानूनी जमावड़े के सदस्य के रूप में पहुंचे और अस्पताल में ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों के साथ कथित तौर पर आपराधिक बल का इस्तेमाल किया। इस मामले में आरोपी बनाए गए लोगों में 73 वर्षीय रियल एस्टेट व्यवसायी रमेश सुखार्या म्हात्रे, 50 वर्षीय मजदूर रमेश लक्ष्मण पवार, 35 वर्षीय पेंटर प्रमोद उर्फ प्रकाश उद्धव निकम, 30 वर्षीय मजदूर अक्षय शरद करांडे और 52 वर्षीय गृहिणी साधना शरद करांडे शामिल हैं।


चार्ज के मुताबिक, आरोपियों ने शिकायतकर्ता डॉ. वैभव नामदेव सालुंखे और गवाह डॉ. सृष्टि बाविस्कर के साथ कथित तौर पर मारपीट कर चोट पहुंचाई। दोनों उस समय सरकारी अस्पताल में अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। अभियोजन का आरोप है कि आरोपियों ने अस्पताल के अन्य कर्मचारियों के साथ भी बल और हिंसा का इस्तेमाल किया। मामले में आरोपियों पर गैरकानूनी जमावड़े के सामान्य उद्देश्य के तहत आपराधिक बल का इस्तेमाल करने, सरकारी ड्यूटी कर रहे लोक सेवकों को चोट पहुंचाने, हिंसा करने, जानबूझकर अपमान करने और आपराधिक धमकी देने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों में BNS की धाराएं 132, 121(1), 189(2), 191(2), 352 और 351(2), धारा 190 के साथ लगाई गई हैं। इसके अलावा, डॉ. सृष्टि बाविस्कर के खिलाफ कथित तौर पर आपराधिक बल का इस्तेमाल कर उनकी गरिमा/शील भंग करने के इरादे का भी आरोप लगाया गया है। इस संबंध में BNS की धारा 74 लगाई गई है। वहीं, डॉ. सृष्टि बाविस्कर सहित अन्य महिला अस्पताल कर्मचारियों के खिलाफ कथित तौर पर उनकी मर्यादा का अपमान करने वाले शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए BNS की धारा 79 भी लगाई गई है।


अभियोजन के अनुसार, घटना के दौरान शास्त्रीनगर अस्पताल की सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया। इस आधार पर आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस (हिंसा और संपत्ति को नुकसान से रोकथाम) अधिनियम, 2010 की धारा 3 और 4 के तहत भी आरोप तय किए गए हैं। मामले में आरोपी नंबर 5 साधना करांडे पर अन्य आरोपों के कथित तौर पर उकसावे में शामिल होने का भी आरोप है। इसके अलावा, 1 जुलाई 2026 को ठाणे के पुलिस आयुक्त द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक आदेश के उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया है। इस संबंध में महाराष्ट्र पुलिस एक्ट की धारा 37(1) और 135 लगाई गई है। कोर्ट ने सभी आरोपों को आरोपियों को उनकी समझ की भाषा में पढ़कर और समझाकर सुनाया। आरोपियों ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया और खुद को निर्दोष बताया। उनकी दलील के बाद आरोपियों का बयान/प्ली अलग से दर्ज किया गया। इस तरह कल्याण कोर्ट में अब मामले की नियमित सुनवाई और साक्ष्यों की जांच का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट द्वारा आरोप तय किया जाना इस स्तर पर केवल अभियोजन के आरोपों का औपचारिक निर्धारण है; आरोपों की अंतिम सत्यता का फैसला मुकदमे में पेश होने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा।