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बॉम्बे हाईकोर्ट में चोरी-छिपे वीडियो रिकॉर्डिंग करना पड़ा महंगा, जूनियर वकील पर ₹25 हजार और क्लर्क पर ₹10 हजार का जुर्माना
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिना अनुमति अदालत की कार्यवाही का वीडियो बनाने के मामले में एक जूनियर वकील पर 25,000 रुपये और उसके निर्देश पर रिकॉर्डिंग करने वाले क्लर्क पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने मोबाइल फोन जब्त करने और भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने के लिए दोनों से लिखित आश्वासन देने का भी निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुनवाई देखने की अनुमति का मतलब रिकॉर्डिंग करने की छूट नहीं है।
Kalpana Gautam24 अक्टू. 2026, 05:08 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अदालत की कार्यवाही की बिना अनुमति वीडियो रिकॉर्डिंग करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने एक जूनियर वकील को 25,000 रुपये और उसके निर्देश पर रिकॉर्डिंग करने वाले क्लर्क को 10,000 रुपये जमा करने का आदेश दिया। इसके साथ ही रिकॉर्डिंग में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन को जब्त करने और वीडियो को हटाने का निर्देश भी दिया गया। यह आदेश 19 अक्टूबर 2026 को जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने पारित किया।
सुनवाई के दौरान पकड़ा गया क्लर्क
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मामला झुग्गी पुनर्वास परियोजना से जुड़ी कई याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया। हाईकोर्ट के प्रोथोनोटरी एवं सीनियर मास्टर एएच लड्डाध ने अदालत के गलियारे से एक व्यक्ति को कार्यवाही का वीडियो रिकॉर्ड करते हुए देखा। उन्होंने तुरंत कोर्ट को इसकी जानकारी दी। पूछताछ के दौरान क्लर्क ने बताया कि वह एक अन्य वकील के चैंबर में काम करने वाले जूनियर वकील के निर्देश पर वीडियो बना रहा था। इसके बाद अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए दोनों के खिलाफ कार्रवाई की।
कोर्ट ने वकील को भी ठहराया जिम्मेदार
खंडपीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि एक वकील ने अपने क्लर्क को अदालत की कार्यवाही रिकॉर्ड करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि वकीलों से ही सबसे पहले न्यायालय के नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। कोर्ट ने जूनियर वकील पर 25,000 रुपये जमा करने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने उसके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने या बार काउंसिल को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला भेजने से परहेज किया। इस संबंध में अदालत ने वकील के जूनियर होने और पेशेवर प्रशिक्षण एवं अदालती शिष्टाचार की कमी का उल्लेख किया।
मोबाइल जब्त, दोनों को भविष्य के लिए चेतावनी
अदालत ने क्लर्क पर 10,000 रुपये की लागत लगाई और रिकॉर्डिंग के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन जब्त करने का निर्देश दिया। दोनों को भविष्य में इस तरह का कृत्य नहीं दोहराने के लिए बिना शर्त लिखित आश्वासन देने को भी कहा गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आगे इस प्रतिबंध का उल्लंघन होने पर मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और कानून के अनुसार अवमानना सहित उचित कार्यवाही की जा सकती है।
अदालत की कार्यवाही देख सकते हैं, रिकॉर्ड नहीं कर सकते
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत की सुनवाई आम लोगों, वकीलों, छात्रों, पक्षकारों और पत्रकारों के लिए खुली हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग कर सकता है। बॉम्बे हाईकोर्ट के लाइव-स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग संबंधी नियमों के तहत अधिकृत अनुमति के बिना कार्यवाही रिकॉर्ड करना प्रतिबंधित है। अदालत ने यह भी चिंता जताई है कि ऐसे वीडियो को संदर्भ से काटकर या उनमें बदलाव करके सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा सकता है, जिससे कार्यवाही की गलत तस्वीर सामने आ सकती है।
