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जल निकाय की जमीन पर बने 20 फ्लैट गिराने से पहले मालिकों को वैकल्पिक जमीन दें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी मंजूरी और रिकॉर्ड पर भरोसा करके फ्लैट खरीदने वालों को अधिकारियों की गलतियों का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि जल निकाय की जमीन पर बने 20 फ्लैटों को गिराने से पहले मालिकों को वैकल्पिक जमीन दी जाए। इसके लिए छह महीने के भीतर व्यवस्था करने का प्रयास करने को कहा।

जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव और तिरुवल्लुर के जिला कलेक्टर को यह निर्देश दिया। मामला उस जमीन पर बने 20 फ्लैटों से जुड़ा है, जिसे सरकारी रिकॉर्ड में जल निकाय यानी तालाब के रूप में दर्ज किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जल निकायों की रक्षा करना जरूरी है, लेकिन जब सरकारी अधिकारियों की मंजूरी और रिकॉर्ड के आधार पर लोगों ने अपने पैसे लगाकर फ्लैट खरीदे हों, तो उनकी परेशानी को भी ध्यान में रखना होगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला तमिलनाडु के तिरुवल्लुर जिले के तिरुमुलैवोयल गांव का है। यहां की 0.72 एकड़ जमीन सरकारी रिकॉर्ड में जल निकाय के रूप में दर्ज थी। वर्ष 2011 में जिला राजस्व अधिकारी ने पी. रामादोस को इस जमीन का रयोतवारी पट्टा (खेती योग्य जमीन पर अधिकार देने वाला सरकारी पट्टा) जारी कर दिया। जमीन को जल निकाय के बजाय खेती योग्य जमीन मान लिया गया था। इसके बाद रामादोस ने 3.40 करोड़ रुपये का कर्ज लेने के लिए जमीन तमिलनाडु मर्केंटाइल बैंक के पास गिरवी रख दी। जमीन के 0.22 एकड़ हिस्से को उनकी पत्नी के नाम कर दिया गया। उनकी पत्नी ने एक बिल्डर को पावर ऑफ अटॉर्नी दी। इसके बाद बिल्डर ने इस जमीन पर 20 फ्लैट बनाए और उन्हें अलग-अलग लोगों को बेच दिया। बाद में एक व्यक्ति ने जमीन का पट्टा जारी किए जाने को चुनौती दी। दिसंबर 2019 में भूमि प्रशासन आयुक्त ने पट्टा रद्द कर दिया, क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह जमीन जल निकाय की थी। इसके बाद मद्रास हाईकोर्ट ने भी पट्टा रद्द करने के फैसले को सही ठहराया और अवैध निर्माण हटाकर जल निकाय को उसकी पुरानी स्थिति में बहाल करने का आदेश दिया। फ्लैट मालिकों और बैंक ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सरकारी मंजूरी पर भरोसा करके खरीदे गए फ्लैट
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि नगर निगम ने फ्लैटों के निर्माण की योजना को मंजूरी दी थी। राजस्व विभाग ने भी जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव किए और उसके बंटवारे को मंजूरी दी थी। इन सरकारी कदमों के कारण फ्लैट खरीदने वालों को लगा कि जमीन पर निर्माण करना और उसे खरीदना कानूनी रूप से सही है। कोर्ट ने कहा कि आमतौर पर कोई भी खरीदार जमीन या फ्लैट खरीदने से पहले सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित विभागों की मंजूरी पर भरोसा करता है। ऐसे में सरकारी अधिकारियों की गलतियों के कारण खरीदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि फ्लैट गिराए जाने से कई परिवारों के बेघर होने की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए तोड़फोड़ से पहले उनके हितों और जमीन के मालिक या बिल्डर के खिलाफ उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करना जरूरी है।
जल निकाय की जमीन पर निर्माण को नहीं मिली कानूनी मान्यता
सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा कि जल निकाय की जमीन पर बने फ्लैटों का निर्माण वैध हो गया है। कोर्ट ने पुराने सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर माना कि जमीन जल निकाय की थी और उस पर जारी किया गया रयोतवारी पट्टा सही नहीं था। कोर्ट ने तमिलनाडु एस्टेट्स (एबोलिशन एंड कन्वर्जन इनटू रयोतवारी) एक्ट, 1948 की धारा 14-A का भी उल्लेख किया। इस प्रावधान के तहत संबंधित जल संरचनाओं की जमीन पर रयोतवारी पट्टा देने पर रोक है। कोर्ट ने यह तर्क भी स्वीकार नहीं किया कि जमीन को शहरी विकास योजना में आवासीय क्षेत्र घोषित किए जाने से उसकी कानूनी स्थिति बदल गई। आवासीय क्षेत्र में निर्माण की अनुमति होने का मतलब यह नहीं है कि सरकारी जल निकाय की जमीन पर भी निर्माण का अधिकार मिल जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने पट्टा रद्द करने के फैसले को बरकरार रखते हुए फ्लैट मालिकों और बैंक की अपीलें खारिज कर दीं। हालांकि, तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि 0.22 एकड़ जमीन पर बने 20 फ्लैटों को गिराने से पहले फ्लैट मालिकों की सोसाइटी को खाली और उपयुक्त वैकल्पिक जमीन दी जाए। इस व्यवस्था को छह महीने के भीतर पूरा करने का प्रयास करने को कहा गया। कोर्ट ने फ्लैट मालिकों और बैंक को जमीन के मालिक, बिल्डर या संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का विकल्प भी दिया। साथ ही, राज्य सरकार उन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है, जिन्होंने सरकारी रिकॉर्ड और जल निकायों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों का सही तरीके से पालन नहीं किया।
मामले का नाम: S. Gururaj Versus The Additional Chief Secretary/Commissioner of Land Administration and Others (Connected Cases)
