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कंपनी में धोखाधड़ी की शिकायत के लिए SFIO निदेशक के अलावा किसी अन्य अधिकारी को भी केंद्र सरकार दे सकती है अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी अधिनियम के तहत धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में शिकायत दाखिल करने के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार SFIO के निदेशक के अलावा किसी अन्य अधिकारी को भी लिखित सामान्य या विशेष आदेश के जरिए ऐसी शिकायत दाखिल करने के लिए अधिकृत कर सकती है। हालांकि, निजी व्यक्तियों द्वारा दाखिल शिकायत के आधार पर विशेष आर्थिक अपराध अदालत द्वारा ऐसे मामले में संज्ञान लेने के संबंध में कोर्ट ने अपने पहले के फैसले को बरकरार रखा और केंद्र की समीक्षा याचिका खारिज कर दी।

Sonali22 सित. 2026, 08:34 PM IST
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कंपनी में धोखाधड़ी की शिकायत के लिए SFIO निदेशक के अलावा किसी अन्य अधिकारी को भी केंद्र सरकार दे सकती है अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली।

 सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कंपनी में धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में शिकायत दाखिल करने के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार विशेष धोखाधड़ी जांच कार्यालय यानी SFIO के निदेशक के अलावा किसी अन्य अधिकारी को भी धोखाधड़ी से संबंधित शिकायत दाखिल करने के लिए अधिकृत कर सकती है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस के. विनोद चंद्रन तथा जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार की समीक्षा याचिका खारिज करते हुए यह स्पष्टीकरण दिया। कोर्ट ने कहा कि जिस मामले में शिकायत निजी व्यक्तियों द्वारा दाखिल की गई थी, उसमें पहले दिए गए फैसले पर दोबारा विचार करने की आवश्यकता नहीं है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कंपनी द्वारा किए गए कथित धोखाधड़ी के अपराधों के संबंध में आर्थिक अपराधों की विशेष अदालत केवल किसी निजी व्यक्ति की शिकायत के आधार पर संज्ञान नहीं ले सकती। इसी फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने समीक्षा याचिका दायर की थी।

केंद्र सरकार को अधिकारी अधिकृत करने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिका खारिज करते हुए कंपनी अधिनियम की धारा 212(6) के दूसरे प्रावधान की भूमिका को स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार इस प्रावधान के तहत SFIO के निदेशक के अलावा किसी अन्य अधिकारी को भी शिकायत दाखिल करने के लिए अधिकृत कर सकती है। इसके लिए केंद्र सरकार सामान्य या विशेष लिखित आदेश जारी कर सकती है। यानी शिकायत दाखिल करने का अधिकार केवल SFIO के निदेशक तक सीमित नहीं है, बशर्ते संबंधित अधिकारी को केंद्र सरकार द्वारा कानून के तहत अधिकृत किया गया हो। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए किसी अधिकारी को सामान्य या विशेष लिखित आदेश के जरिए शिकायत संस्थित करने के लिए अधिकृत कर सकती है। यह अधिकार SFIO के निदेशक के अतिरिक्त होगा।

निजी शिकायत और अधिकृत अधिकारी में अंतर

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निजी व्यक्तियों द्वारा दाखिल की गई शिकायत और केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी की ओर से दाखिल की जाने वाली शिकायत के बीच अंतर स्पष्ट किया है। पीठ ने कहा कि वर्तमान मामले में शिकायतें निजी व्यक्तियों ने दाखिल की थीं। इसलिए पहले दिए गए फैसले पर पुनर्विचार करने का कोई आधार नहीं बनता। हालांकि, केंद्र सरकार के पास धारा 212(6) के दूसरे प्रावधान के तहत किसी अधिकारी को शिकायत दाखिल करने के लिए अधिकृत करने की शक्ति बनी रहेगी।

इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिका खारिज करते हुए अपने पूर्व फैसले को बरकरार रखा, लेकिन केंद्र सरकार के वैधानिक अधिकार को स्पष्ट कर दिया।

SFIO की भूमिका

SFIO यानी Serious Fraud Investigation Office कॉरपोरेट मामलों से जुड़े गंभीर धोखाधड़ी के मामलों की जांच करने वाली केंद्रीय जांच व्यवस्था है। कंपनी अधिनियम में गंभीर कॉरपोरेट धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में SFIO और उसके अधिकारियों की भूमिका निर्धारित की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट है कि जहां कानून केंद्र सरकार को ऐसा अधिकार देता है, वहां सरकार लिखित सामान्य या विशेष आदेश के माध्यम से SFIO निदेशक के अतिरिक्त किसी अन्य अधिकारी को भी शिकायत दाखिल करने के लिए अधिकृत कर सकती है।