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'आग दुर्घटनावश नहीं लगती': सुप्रीम कोर्ट ने 2.4 करोड़ रुपये के फायर इंश्योरेंस क्लेम को खारिज करने का फैसला बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने 2.4 करोड़ रुपये के फायर इंश्योरेंस क्लेम से जुड़े मामले में बीमा कंपनी को बड़ी राहत दी है। अदालत ने बीमा कंपनी द्वारा दावे को खारिज करने के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि मामले की परिस्थितियों से आग दुर्घटनावश हुई प्रतीत नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड और उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर विचार करने के बाद बीमित पक्ष के दावे को स्वीकार नहीं किया।

नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने 2.4 करोड़ रुपये के फायर इंश्योरेंस क्लेम से जुड़े मामले में बीमा कंपनी द्वारा दावा खारिज किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए टिप्पणी की कि आग लगने की घटना दुर्घटनावश हुई प्रतीत नहीं होती। मामला New India Assurance Company Ltd से जुड़े बीमा विवाद का था। बीमित पक्ष ने आग लगने से हुए नुकसान के लिए बीमा पॉलिसी के तहत करीब 2.4 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा किया था। हालांकि, बीमा कंपनी ने दावे को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद विवाद न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और आग लगने से जुड़ी परिस्थितियों का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि घटना से जुड़े तथ्यों को केवल एक सामान्य आकस्मिक आग के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसी आधार पर बीमा कंपनी द्वारा क्लेम को खारिज किए जाने के निर्णय को बरकरार रखा गया।
बीमा क्लेम पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए कहा कि आग की घटना दुर्घटनावश हुई प्रतीत नहीं होती। अदालत ने बीमा विवाद में केवल नुकसान होने के तथ्य को पर्याप्त नहीं माना, बल्कि यह भी देखा कि आग किन परिस्थितियों में लगी और बीमा कंपनी द्वारा दावा खारिज करने के पीछे क्या आधार था। बीमा अनुबंध के तहत बीमित व्यक्ति को पॉलिसी की शर्तों के अनुसार ही क्षतिपूर्ति मिलती है। ऐसे मामलों में दावा करने वाले पक्ष को पॉलिसी के दायरे और घटना की परिस्थितियों को स्थापित करना होता है, जबकि बीमा कंपनी द्वारा दावा अस्वीकार किए जाने के कारणों का भी न्यायिक परीक्षण किया जा सकता है।
2.4 करोड़ रुपये के दावे का विवाद
इस मामले में आग लगने की घटना के बाद बीमित पक्ष ने भारी आर्थिक नुकसान का दावा करते हुए बीमा कंपनी से करीब 2.4 करोड़ रुपये की राशि मांगी थी। बीमा कंपनी ने दावे को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद मामला उपभोक्ता विवाद के रूप में आगे बढ़ा और अंततः सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहुंचा। शीर्ष अदालत ने उपलब्ध सामग्री और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद बीमा कंपनी के रुख को बरकरार रखा। इसका मतलब है कि संबंधित पक्ष को 2.4 करोड़ रुपये का फायर इंश्योरेंस क्लेम नहीं मिलेगा।
परिस्थितियों के आधार पर फैसला
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि बीमा दावों के मामलों में अदालतें घटना की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और पॉलिसी की शर्तों को समग्र रूप से देख सकती हैं। केवल आग लगने और संपत्ति को नुकसान पहुंचने से अपने आप बीमा भुगतान का अधिकार तय नहीं हो जाता। अदालत ने मामले में उपलब्ध परिस्थितिजन्य सामग्री को ध्यान में रखते हुए बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज किए जाने के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया।
