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जाति प्रमाणपत्र रद्द होने के खिलाफ अपील लंबित है तो 30 दिन तक नहीं छीना जा सकता लाभ: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामले में स्पष्ट किया है कि स्क्रूटिनी कमेटी द्वारा प्रमाणपत्र अमान्य किए जाने के खिलाफ अपील लंबित होने पर उसके आधार पर मिले लाभ तुरंत वापस नहीं लिए जा सकते। महाराष्ट्र जाति प्रमाणपत्र अधिनियम की धारा 10(5) का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि अपील खारिज होने के बाद भी लाभ वापस लेने की कार्रवाई 30 दिन बाद ही की जा सकती है। अदालत ने याचिकाकर्ता को VJTI में सिविल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में प्रोविजनल प्रवेश देने का निर्देश दिया है।

Sonali22 सित. 2026, 08:35 PM IST
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जाति प्रमाणपत्र रद्द होने के खिलाफ अपील लंबित है तो 30 दिन तक नहीं छीना जा सकता लाभ: बॉम्बे हाईकोर्ट

मुंबई।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने जाति प्रमाणपत्र और उससे मिलने वाले लाभ को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जाति प्रमाणपत्र को स्क्रूटिनी कमेटी ने अमान्य कर दिया है और संबंधित व्यक्ति ने इसके खिलाफ अपील दायर की है, तो अपील लंबित रहने के दौरान उसके आधार पर मिले लाभ वापस नहीं लिए जा सकते। अपील खारिज होने के बाद भी लाभ वापस लेने की कार्रवाई 30 दिन पूरे होने के बाद ही की जा सकती है। जस्टिस आर.आई. चागला और जस्टिस फिरदौस पी. पूनिवाला की खंडपीठ ने यह आदेश एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ता ने मुंबई के वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (VJTI) में सिविल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए राहत की मांग की थी। मामले में याचिकाकर्ता के ट्राइब सर्टिफिकेट को अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने 1 सितंबर 2026 के आदेश से अमान्य कर दिया था। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने अपील दायर की थी।

अपील लंबित रहने तक नहीं छीना जा सकता लाभ

हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जाति, घुमंतू जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और विशेष पिछड़ा वर्ग के जाति प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन से संबंधित अधिनियम, 2000 की धारा 10(5) पर भरोसा किया। अदालत ने कहा कि यदि स्क्रूटिनी कमेटी द्वारा जाति प्रमाणपत्र रद्द और जब्त किया जाता है तथा संबंधित व्यक्ति इसके खिलाफ अपील करता है, तो अपील लंबित रहने के दौरान प्रमाणपत्र के आधार पर पहले से मिले लाभ वापस नहीं लिए जा सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अपील खारिज हो जाती है, तो संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी और अन्य प्राधिकारी अपीलीय प्राधिकारी के आदेश की तारीख से 30 दिन के बाद लाभ वापस लेने की कार्रवाई कर सकते हैं।

VJTI में प्रवेश के लिए मांगी गई थी राहत

याचिकाकर्ता के लिए 7 सितंबर 2026 को VJTI के सिविल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए ट्राइब वैलिडिटी सर्टिफिकेट जमा करने की अंतिम तारीख थी। सुनवाई के समय तक राज्य CET सेल ने उसका सीट आवंटन रद्द नहीं किया था। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसने 1 सितंबर के स्क्रूटिनी कमेटी के आदेश के खिलाफ अपील दायर कर दी है। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य CET सेल को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के प्रवेश पर विचार करे और ट्राइब वैलिडिटी सर्टिफिकेट जमा करने पर जोर दिए बिना उसे प्रोविजनल एडमिशन दे।

OBC और SEBC उम्मीदवारों का भी किया उल्लेख

अदालत ने अपने 3 सितंबर 2026 के पहले के आदेश का भी उल्लेख किया। उस आदेश में 2 जुलाई 2026 के सरकारी प्रस्ताव पर विचार करते हुए कहा गया था कि SEBC और OBC श्रेणी के उम्मीदवारों को प्रवेश की तारीख से छह महीने के भीतर जाति वैधता प्रमाणपत्र जमा करने का अवसर दिया गया था। हाईकोर्ट ने तब यह सवाल उठाया था कि इसी तरह की सुविधा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जाति और घुमंतू जनजाति के उम्मीदवारों को क्यों नहीं दी जानी चाहिए।

अंतरिम आदेश पर अंतिम अधिकार नहीं

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को दी गई अंतरिम राहत को रिट याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रखा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरिम आदेश के आधार पर याचिकाकर्ता भविष्य में किसी प्रकार के स्थायी अधिकार या समानता का दावा नहीं कर सकेगा। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। मामले का शीर्षक Vivek s/o Prakash Padalwar v. The State of Maharashtra है और यह रिट याचिका संख्या 11965/2026 से संबंधित है।