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धार्मिक जुलूसों में डीजे के शोर पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब
धार्मिक जुलूसों में डीजे से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र सरकार से पूछा है कि डीजे के शोर को नियंत्रित करने के लिए कानून में क्या प्रावधान हैं और उनका कितना पालन कराया जा रहा है। कोर्ट ने महाधिवक्ता डॉ. मिलिंद साठे से मंगलवार दोपहर तक पूरी जानकारी देने को कहा है।

मुंबई:
बॉम्बे हाईकोर्ट ने धार्मिक जुलूसों के दौरान होने वाले ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने खास तौर पर डीजे और तेज आवाज में बजने वाले संगीत के कारण होने वाले शोर को लेकर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकार से यह बताने को कहा है कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए कानून के तहत क्या प्रावधान हैं और अब तक उनका कितना पालन कराया गया है। सोमवार, 21 सितंबर 2026 को जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौजूदा गणेश चतुर्थी उत्सव के दौरान धार्मिक जुलूसों में आधी रात के बाद तक डीजे बजाए जाने और उससे स्थानीय निवासियों को होने वाली परेशानी का संज्ञान लिया। खंडपीठ ने महाराष्ट्र सरकार के महाधिवक्ता डॉ. मिलिंद साठे को निर्देश दिया कि वे धार्मिक जुलूसों के दौरान विशेष रूप से डीजे से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी कोर्ट के सामने रखें।
कोर्ट ने पूछा कि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कौन-कौन से वैधानिक कानून लागू हैं और उनके अनुपालन के लिए प्रशासन ने अब तक क्या कार्रवाई की है। पीठ ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित कानूनी प्रावधान मौजूद होने के बावजूद उनका कितना पालन कराया जा रहा है। खंडपीठ ने महाधिवक्ता को मंगलवार दोपहर तक इस संबंध में आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कोर्ट की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब गणेश चतुर्थी उत्सव के दौरान मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई शहरों में धार्मिक जुलूस निकाले जा रहे हैं। कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिया कि कुछ स्थानों पर डीजे आधी रात के बाद भी बजाए जा रहे हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को ध्वनि प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि धार्मिक जुलूसों के दौरान ध्वनि प्रदूषण से जुड़ा एक जनहित याचिका मामला पहले से ही बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित है। यह मामला मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष लंबित है। हालांकि, मौजूदा मामले में जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने स्वयं संज्ञान लेते हुए सरकार से तत्काल जानकारी मांगी है। अब मंगलवार को सरकार की ओर से यह बताया जाएगा कि धार्मिक आयोजनों और जुलूसों के दौरान ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कौन से कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं।
