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कल्याण कोर्ट का बड़ा फैसला: 300 गैस सिलेंडर के गबन मामले में आरोपी बरी, 31 साल बाद आया फैसला

कल्याण कोर्ट ने 300 घरेलू गैस सिलेंडर के कथित गबन के 31 साल पुराने मामले में आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।

Sonali25 सित. 2026, 06:15 PM IST
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कल्याण कोर्ट का बड़ा फैसला: 300 गैस सिलेंडर के गबन मामले में आरोपी बरी, 31 साल बाद आया फैसला

कल्याण। 

300 घरेलू गैस सिलेंडर के कथित गबन और चोरी का माल खरीदने के 31 साल पुराने मामले में कल्याण की अदालत ने आरोपी बरसाती चुलही कलवार को बरी कर दिया है। प्रथम वर्ग न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय क्रमांक-3 के पीठासीन अधिकारी निलेश प्रभाकर वासाडे ने 21 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 407 और 411 सहपठित धारा 34 के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। यह मामला विष्णुनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज अपराध क्रमांक 59/1995 और नियमित फौजदारी खटला क्रमांक 346/1995 से संबंधित था। आरोपी को वर्ष 1995 में गिरफ्तार किया गया था। बाद में लगातार गैरहाजिर रहने के कारण उसे फरार घोषित किया गया था। मुकदमे की शुरुआत वर्ष 1996 में हुई और करीब 31 साल बाद 21 सितंबर 2026 को अदालत ने अपना फैसला सुनाया।


क्या था पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 21 जून 1995 से 23 जून 1995 के बीच भारत पेट्रोलियम कंपनी ने मोटार लॉरी क्रमांक MTT 3494 में घरेलू इस्तेमाल के 300 भरे हुए गैस सिलेंडर रखकर उन्हें वसई स्थित देवतलाव बसीन एग्रीकल्चर मल्टीपरपज को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में पहुंचाने के लिए दिए थे। आरोप था कि आरोपी और फरार आरोपियों ने आपस में मिलीभगत कर इन सिलेंडरों का गबन किया और उन्हें दूसरे व्यक्ति को बेच दिया। मामले में यह भी आरोप लगाया गया था कि फरार आरोपियों में से एक ने चोरी के माल के बारे में जानकारी होने के बावजूद गैस सिलेंडर स्वीकार किए। शिकायत के आधार पर विष्णुनगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और कथित जब्ती का पंचनामा किया तथा संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। इसके बाद आरोपी के खिलाफ धारा 407 और 411 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया।


अभियोजन ने सात गवाहों की गवाही कराई

अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष ने कुल सात गवाहों की गवाही दर्ज कराई। इनमें पंच गवाह, संबंधित गवाह और शिकायतकर्ता शामिल थे। हालांकि, अदालत ने पाया कि कुछ महत्वपूर्ण गवाह अभियोजन के पक्ष में नहीं आए। अभियोजन पक्ष ने उनसे प्रतिपरीक्षा की, लेकिन आरोपों की पुष्टि कराने वाला ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया। एक गवाह ने गैस सिलेंडर की जब्ती के पंचनामे की पुष्टि की, लेकिन उसने बताया कि उसने बिना किसी पूछताछ के पंचनामे पर हस्ताक्षर किए थे। दूसरे पंच गवाह की गवाही भी घटनास्थल से संबंधित पंचनामे तक सीमित रही और उससे आरोपी का अपराध से सीधा संबंध साबित नहीं हुआ। भारत पेट्रोलियम से संबंधित गवाह ने मुख्य रूप से पुलिस को भेजे गए पत्र और गैस सिलेंडरों की आपूर्ति से जुड़ी जानकारी दी। अदालत ने पाया कि इस गवाही से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने सिलेंडरों के वितरण में किस तरह गड़बड़ी की या कथित गबन में उसकी प्रत्यक्ष भूमिका क्या थी।


अदालत ने आरोपी को किया बरी

सभी साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि आरोपी ने भारत पेट्रोलियम कंपनी के 300 भरे हुए गैस सिलेंडरों का विश्वासघात कर गबन किया था। रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए। इसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी बरसाती चुलही कलवार को भारतीय दंड संहिता की धारा 407 और 411 सहपठित धारा 34 के आरोपों से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 248(1) के तहत बरी कर दिया। आरोपी और जमानतदार के बंधपत्र रद्द कर दिए गए। अदालत ने निर्देश दिया कि अपील होने की स्थिति में आरोपी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437-A के अनुसार जमानत प्रस्तुत करे।

फरार आरोपियों के संबंध में भी पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण उन्हें दोषमुक्त किया गया। जब्त मुद्देमाल की नियमानुसार विल्हेवाट करने का आदेश भी अदालत ने दिया।