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कल्याण कोर्ट का फैसला: सोसायटी ऑफिस में चोरी की कोशिश और आग लगाने के 11 साल पुराने मामले में आरोपी बरी

डोंबिवली के सोसायटी ऑफिस में चोरी की कोशिश और आग लगाने के 11 साल पुराने मामले में कल्याण कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि मुख्य शिकायतकर्ता आरोपी को पहचान नहीं सका और अभियोजन पक्ष उसकी संलिप्तता संदेह से परे साबित नहीं कर पाया।

Sonali22 सित. 2026, 08:39 PM IST
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कल्याण कोर्ट का फैसला: सोसायटी ऑफिस में चोरी की कोशिश और आग लगाने के 11 साल पुराने मामले में आरोपी बरी

कल्याण।

 डोंबिवली के जयकांता भवन स्थित सोसायटी ऑफिस में चोरी की कोशिश और आग लगाने के करीब 11 साल पुराने मामले में कल्याण की अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया है। प्रथम वर्ग न्यायिक दंडाधिकारी छठे न्यायालय की पीठासीन अधिकारी के.एस. कातकाडे ने 21 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी लक्ष्मण सुरेश शिवशरण को भारतीय दंड संहिता की धारा 457, 427, 435 और 511 के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।


क्या था मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 जनवरी 2014 की शाम करीब 6:15 बजे शिकायतकर्ता नवीन देवराम आमले और सोसायटी के मैनेजर ने जयकांता भवन, पाथर रोड, डोंबिवली पूर्व स्थित सोसायटी का ऑफिस बंद कर दिया था। अगले दिन सुबह करीब 4:30 बजे शिकायतकर्ता को शीतल शिंदे का फोन आया कि सोसायटी के ऑफिस से धुआं निकल रहा है। मौके पर पहुंचने के बाद आग बुझाई गई। जांच करने पर ऑफिस की खिड़की के लोहे के गज कटे और मुड़े हुए मिले। टेबल का ड्रॉअर खुला हुआ था और तिजोरी तोड़ने की कोशिश के निशान भी मिले। इसके बाद डोंबिवली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई और अपराध क्रमांक 6/2014 के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपी पर चोरी के इरादे से अवैध प्रवेश करने, ऑफिस को नुकसान पहुंचाने, आग लगाने और चोरी का प्रयास करने के आरोप लगाए गए थे।


मुख्य गवाह आरोपी को पहचान नहीं सका

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दो प्रमुख गवाहों की गवाही कराई। शिकायतकर्ता नवीन आमले ने अदालत में अपनी शिकायत और हस्ताक्षर की पहचान की, लेकिन स्पष्ट रूप से कहा कि उसने आरोपी को घटना के समय देखा नहीं था और वह आरोपी को पहचान नहीं सकता। दूसरे गवाह विजय रामचंद्र पानसरे ने भी अभियोजन पक्ष के कथन के अनुसार गवाही दी, लेकिन उसकी गवाही से आरोपी की घटना में संलिप्तता साबित नहीं हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से अन्य कोई महत्वपूर्ण गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।


अदालत ने कहा- आरोप संदेह से परे साबित नहीं

अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता और गवाह आरोपी की पहचान नहीं कर सके। रिकॉर्ड पर आरोपी के खिलाफ ऐसा कोई ठोस कथन या साक्ष्य नहीं आया, जिससे यह साबित हो सके कि उसने फरार आरोपी के साथ मिलकर सोसायटी ऑफिस में चोरी की कोशिश की, आग लगाई या नुकसान पहुंचाया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष अपराध के महत्वपूर्ण तत्वों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। इसलिए संदेह का लाभ आरोपी को दिया गया।


11 साल बाद आरोपी दोषमुक्त

प्रथम वर्ग न्यायिक दंडाधिकारी छठे न्यायालय, कल्याण ने आरोपी लक्ष्मण सुरेश शिवशरण को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 248(1) के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 457, 427, 435 और 511 के आरोपों से बरी कर दिया। आरोपी और जमानतदार के बंधपत्र रद्द कर दिए गए हैं। अपील होने की स्थिति में आरोपी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437-A के अनुसार जमानत प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। अदालत ने फरार आरोपी सागर कृष्णा पाटील को भी संबंधित आरोपों से दोषमुक्त किए जाने का आदेश दर्ज किया है।