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रेलवे केबल चोरी मामले में आरोपी ने कोर्ट में कबूला अपराध, 3.45 लाख की संपत्ति से जुड़ा है मामला
दिवा-कोपर के बीच रेलवे की करीब 150 मीटर लंबी केबल को गैरकानूनी तरीके से कब्जे में रखने के करीब पांच साल पुराने मामले में आरोपी ने अदालत के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। 3 लाख 45 हजार रुपये की अनुमानित कीमत वाली इस रेलवे संपत्ति से जुड़े मामले में आरोपी ने कम सजा देने की गुहार लगाई।

दिवा-कोपर के बीच रेलवे संपत्ति को गैरकानूनी तरीके से कब्जे में रखने के करीब पांच साल पुराने मामले में आरोपी क्रमांक 5 अनिल कुमार नमीकुमार कश्यप ने न्यायालय के समक्ष अपना अपराध स्वीकार कर लिया। यह मामला रेलवे के सिग्नल एवं दूरसंचार (एस एंड टी) विभाग की करीब 150 मीटर लंबी केबल वायर से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित कीमत 3 लाख 45 हजार रुपये बताई गई है। मामला नियमित फौजदारी खटला क्रमांक 1166/2021 और रजिस्टर क्रिमिनल केस क्रमांक 01/2021 के तहत दर्ज किया गया था। आरोपी क्रमांक 1 से 5 के खिलाफ रेलवे संपत्ति को गैरकानूनी तरीके से कब्जे में रखने के आरोप में रेलवे संपत्ति (गैरकानूनी कब्जा) अधिनियम की धारा 3(ए) के तहत कार्रवाई की गई थी।
फैसले के अनुसार, 26 मई 2021 को दोपहर करीब 3 बजे दिवा-कोपर के बीच किलोमीटर क्रमांक 44/1, दातिवली सेंट्रल केबिन के पास रेलवे के एस एंड टी विभाग की लगभग 150 मीटर लंबी केबल वायर को गैरकानूनी तरीके से कब्जे में रखने का आरोप था। इस संपत्ति की अनुमानित कीमत 3,45,000 रुपये बताई गई। 19 सितंबर 2026 को आरोपी अनिल कुमार नमीकुमार कश्यप न्यायालय में उपस्थित हुआ और उसने अपना अपराध स्वीकार करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। न्यायालय ने उसकी अपराध स्वीकारोक्ति की स्वेच्छा की पुष्टि की। इसके बाद आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए और उसका बयान दर्ज कर सजा के संबंध में उसका पक्ष सुना गया। आरोपी ने न्यायालय से अपने परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए कम से कम सजा देने का अनुरोध किया। न्यायालय ने उसे अपराध के लिए निर्धारित सजा के बारे में भी बताया, जिसके बावजूद आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार किया। फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि मामले में चोरी गई रेलवे संपत्ति की कीमत करीब 3 लाख 45 हजार रुपये है और प्रकरण लगभग पांच वर्ष पुराना है। आरोपी की अपराध स्वीकारोक्ति तथा मामले से जुड़ी अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने उसके संबंध में निर्णय लिया।
यह फैसला 19 सितंबर 2026 को घोषित किया गया।
