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कल्याण में रेलवे टिकट की रकम में गड़बड़ी के 16 साल पुराने मामले में आरोपी बरी

कल्याण रेलवे स्टेशन पर टिकट बिक्री की रकम में गड़बड़ी के 16 साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी सुनील गंगाधर सालवे को बरी कर दिया। आरोपी पर 7,189 रुपये रेलवे में जमा नहीं करने का आरोप था, लेकिन कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।

Sonali26 सित. 2026, 01:51 PM IST
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कल्याण में रेलवे टिकट की रकम में गड़बड़ी के 16 साल पुराने मामले में आरोपी बरी

कल्याण रेलवे पुलिस से जुड़े 16 साल पुराने गबन के मामले में कल्याण रेलवे न्यायालय ने आरोपी सुनील गंगाधर सालवे को बरी कर दिया। आरोपी पर रेलवे के खाड़ी रेलवे स्टेशन पर बुकिंग क्लर्क के रूप में काम करते हुए टिकट बिक्री से प्राप्त 7,189 रुपये की रकम रेलवे प्रशासन के पास जमा नहीं करने का आरोप था। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। यह मामला नियमित फौजदारी खटला क्रमांक 49/2010 और कल्याण लोहमार्ग पुलिस थाना अपराध क्रमांक 39/2009 से संबंधित था। मामले की सुनवाई कल्याण स्थित प्रथमवर्ग न्यायिक दंडाधिकारी, लोहमार्ग न्यायालय में हुई। न्यायालय ने 17 सितंबर 2026 को अपना फैसला सुनाया।


अभियोजन के अनुसार, 24 फरवरी 2009 को आरोपी सुनील सालवे खाड़ी रेलवे स्टेशन पर बुकिंग क्लर्क के पद पर कार्यरत था। रेलवे टिकट बिक्री से प्राप्त रकम नियमानुसार रेलवे प्रशासन के संबंधित विभाग में जमा करना उसकी जिम्मेदारी थी। आरोप था कि उसने करीब 7,189 रुपये की रकम जमा नहीं की और उसे स्वयं रख लिया। शिकायत के बाद कल्याण लोहमार्ग पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले में अभियोजन पक्ष ने दो प्रमुख गवाहों की गवाही कराई। इनमें से एक गवाह माणिकराव शाहादू बोरसे ने रेलवे स्टेशन पर टिकट बिक्री और रकम जमा करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। दूसरे गवाह संतोष रत्नाकर महाले ने आरोपी के ड्यूटी पर होने तथा उसके पास बुकिंग का कार्य होने से संबंधित परिस्थितियों के बारे में बयान दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 फरवरी 2009 को टिकट बिक्री की रकम की जांच के दौरान करीब 10,000 रुपये में से केवल 3,000 रुपये बैंक में जमा किए जाने और करीब 7,000 रुपये जमा नहीं किए जाने की बात सामने आई। हालांकि, अदालत ने गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विसंगतियां पाईं। कोर्ट ने कहा कि गवाहों की गवाही से यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं होता कि आरोपी ने वास्तव में कितनी रकम टिकट बिक्री से प्राप्त की थी और शिकायत किए जाने से पहले बैंक में कितनी रकम जमा की गई थी। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि शिकायतकर्ता गवाह ने अपनी जिरह में शिकायत दर्ज कराने के संबंध में दबाव बनाए जाने की बात स्वीकार की थी।


मामले के जांच अधिकारी की गवाही भी अभियोजन के लिए उपलब्ध नहीं हो सकी क्योंकि उनकी मृत्यु हो चुकी थी। इसके अलावा, अन्य महत्वपूर्ण गवाहों को भी अदालत के समक्ष पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने माना कि मामले की तकनीकी जांच से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं आ सके। इन परिस्थितियों में अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत अपराध को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। संदेह का लाभ देते हुए आरोपी सुनील गंगाधर सालवे को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 248(1) के तहत दोषमुक्त कर दिया गया। अदालत ने आरोपी का व्यक्तिगत जमानत बंधपत्र और जमानतदार बंधपत्र रद्द करने का आदेश दिया। साथ ही अपील होने की स्थिति में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 15,000 रुपये का बंधपत्र छह महीने तक वैध रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने मामले में जब्त 7,186 रुपये की राशि शिकायतकर्ता को देने का भी आदेश दिया। यह राशि अपील की अवधि समाप्त होने के बाद स्थायी रूप से शिकायतकर्ता के कब्जे में देने की बात कही गई है।