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कल्याण रेलवे स्टेशन पर महिला का पीछा करने के 6 साल पुराने मामले में आरोपी बरी, कोर्ट ने साक्ष्यों पर उठाए सवाल

कल्याण रेलवे स्टेशन और आसपास के रेल मार्ग पर महिला का पीछा करने के करीब छह साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी उत्तम भीमराव भरित को बरी कर दिया। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी द्वारा महिला का पीछा करने के आरोप को संदेह से परे साबित नहीं कर सका और मामले में कोई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी या ठोस दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किया गया।

Sonali22 सित. 2026, 08:38 PM IST
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कल्याण रेलवे स्टेशन पर महिला का पीछा करने के 6 साल पुराने मामले में आरोपी बरी, कोर्ट ने साक्ष्यों पर उठाए सवाल

कल्याण रेलवे स्टेशन और आसपास के रेलवे मार्ग पर एक महिला का पीछा कर उसे परेशान करने के आरोप से जुड़े करीब छह साल पुराने मामले में कल्याण रेलवे न्यायालय ने आरोपी उत्तम भीमराव भरित को बरी कर दिया। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354(ड) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। यह मामला नियमित फौजदारी खटला क्रमांक 203/2020 और कल्याण लोहमार्ग पुलिस थाना अपराध क्रमांक 3415/2019 से संबंधित था। मामले की सुनवाई कल्याण के लोहमार्ग न्यायालय में प्रथमवर्ग न्यायिक दंडाधिकारी वी.पी. शिंदे के समक्ष हुई। अदालत ने 16 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया। अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता महिला वर्ष 2018 से 30 सितंबर 2019 तक कल्याण रेलवे स्टेशन के ओवरब्रिज तथा कल्याण से आसनगांव रेलवे स्टेशन के बीच यात्रा करती थी। आरोप था कि आरोपी उत्तम भरित अलग-अलग मौकों पर उसका पीछा करता था और उसके ऐसे कृत्य करता था, जिससे महिला को मानसिक परेशानी और लज्जा महसूस होती थी।


30 सितंबर 2019 की घटना के संबंध में शिकायतकर्ता ने बताया कि वह सीएसटी से आसनगांव जाने वाली लोकल ट्रेन से दोपहर करीब 3:40 बजे कल्याण पहुंची थी। उसके अनुसार आरोपी उसका पीछा करते हुए कल्याण स्टेशन से आगे तक आया। बाद में वह रिक्शा में बैठी तो आरोपी भी उसी रिक्शा में बैठ गया। इसके बाद शिकायतकर्ता आरोपी को शाहपुर पुलिस स्टेशन ले गई और वहां घटना की शिकायत दर्ज कराई। मामले की जांच के बाद कल्याण लोहमार्ग पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354(ड) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया। 14 सितंबर 2021 को अदालत ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए थे, लेकिन उसने अपराध स्वीकार नहीं किया और मुकदमा आगे चला। अभियोजन पक्ष ने मामले में दो गवाहों की गवाही कराई। इनमें शिकायतकर्ता महिला और जांच से संबंधित महिला पुलिस हवलदार मंदाकिनी विजयकुमार माने शामिल थीं। हालांकि, अदालत ने गवाहों के बयानों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभासों पर गौर किया। कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता ने आरोपी द्वारा वर्ष 2018 से पीछा किए जाने की बात कही, लेकिन इस संबंध में कोई स्वतंत्र दस्तावेजी या प्रत्यक्ष साक्ष्य अभियोजन पक्ष द्वारा पेश नहीं किया गया। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि मामले की कथित घटना के प्रत्यक्षदर्शी के रूप में शिकायतकर्ता के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को गवाही के लिए पेश नहीं किया गया।


जांच अधिकारी ने अपनी गवाही में यह स्वीकार किया कि शिकायतकर्ता द्वारा आरोपी के खिलाफ पहले भी पीछा करने की शिकायत किए जाने के संबंध में अन्य स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए गए थे। रिक्शा चालक और उसमें मौजूद यात्रियों से संबंधित भी कोई ठोस साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने गवाहों के बयानों में मौजूद विरोधाभासों और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ धारा 354(ड) का अपराध संदेह से परे साबित नहीं कर सका। संदेह का लाभ देते हुए आरोपी उत्तम भीमराव भरित को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 248(1) के तहत बरी कर दिया गया। कोर्ट ने आरोपी का व्यक्तिगत बंधपत्र और जमानत बंधपत्र रद्द करने का आदेश दिया तथा अपील की स्थिति में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 15,000 रुपये का बंधपत्र छह महीने तक वैध रखने का निर्देश दिया। मामले में कोई जब्त मुद्देमाल नहीं होने के कारण उसके संबंध में कोई आदेश नहीं दिया गया।