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यूपी पुलिस भर्ती में लंबित आपराधिक केस छिपाना हर हाल में गलत जानकारी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस भर्ती से जुड़े मामले में कहा कि यदि आवेदन फॉर्म में केवल दोषसिद्धि के बारे में पूछा गया था, तो लंबित आपराधिक मामले का खुलासा न करना अपने आप में तथ्य छिपाना नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि उम्मीदवारी रद्द करने से पहले अधिकारियों को फॉर्म में पूछी गई जानकारी और मामले की परिस्थितियों पर विचार करना जरूरी है।

Sonali26 सित. 2026, 03:06 PM IST
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यूपी पुलिस भर्ती में लंबित आपराधिक केस छिपाना हर हाल में गलत जानकारी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

लखनऊ। 

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि भर्ती आवेदन फॉर्म में उम्मीदवार से केवल यह पूछा गया था कि क्या उसे किसी अपराध में दोषी ठहराया गया है, तो लंबित आपराधिक मामले की जानकारी नहीं देना अपने आप में गलत घोषणा या जानबूझकर तथ्य छिपाना नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर किसी उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द करने से पहले संबंधित अधिकारियों को आवेदन फॉर्म में पूछी गई जानकारी और मामले की परिस्थितियों पर उचित विचार करना होगा। अदालत ने यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें पुलिस भर्ती के एक उम्मीदवार की उम्मीदवारी लंबित आपराधिक मामले का खुलासा नहीं करने के आधार पर रद्द कर दी गई थी। उम्मीदवार की ओर से इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था।

फॉर्म में सिर्फ दोषसिद्धि से जुड़ा सवाल

मामले में हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवार से मांगी गई जानकारी की प्रकृति पर विशेष ध्यान दिया। अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में उम्मीदवार से यह घोषणा करने को कहा गया था कि उसे किसी आपराधिक मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है। ऐसी स्थिति में उम्मीदवार के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित होने के बावजूद, यदि उसे उस मामले में दोषी नहीं ठहराया गया था, तो केवल लंबित मामले का उल्लेख नहीं करने को सीधे तौर पर गलत घोषणा मानने पर सवाल उठता है।

हर गैर-खुलासा जानबूझकर छिपाना नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी उम्मीदवार द्वारा किसी जानकारी का खुलासा नहीं करने को सीधे तौर पर जानबूझकर तथ्य छिपाने के रूप में नहीं माना जा सकता। यह देखना आवश्यक है कि आवेदन फॉर्म में उम्मीदवार से वास्तव में क्या जानकारी मांगी गई थी। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि भर्ती प्राधिकारी को उम्मीदवारी रद्द करने का फैसला लेते समय मामले के सभी प्रासंगिक पहलुओं पर विचार करना चाहिए। केवल लंबित आपराधिक मामले के आधार पर उम्मीदवार के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं होगा, खासकर तब जब आवेदन फॉर्म में लंबित मामलों के बारे में स्पष्ट रूप से जानकारी नहीं मांगी गई हो।

उम्मीदवारी रद्द करने से पहले परिस्थितियों पर विचार जरूरी

अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवार की सत्यता और आचरण महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन किसी उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द करने का निर्णय यांत्रिक तरीके से नहीं लिया जा सकता। प्राधिकारी को यह देखना होगा कि उम्मीदवार से किस प्रकार की घोषणा मांगी गई थी, उसने उस घोषणा में क्या जानकारी दी और संबंधित आपराधिक मामले की स्थिति क्या थी। इन पहलुओं पर विचार किए बिना केवल गैर-खुलासे के आधार पर कार्रवाई करना उचित नहीं होगा।

पुलिस भर्ती से जुड़ा मामला

यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती प्रक्रिया से संबंधित था। उम्मीदवार की ओर से दलील दी गई कि आवेदन फॉर्म में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी देने के संबंध में स्पष्ट सवाल नहीं पूछा गया था। इसलिए केवल इस आधार पर उसकी उम्मीदवारी को रद्द करना उचित नहीं था। हाईकोर्ट ने इसी संदर्भ में कहा कि लंबित आपराधिक मामला और किसी अपराध में दोषसिद्धि दो अलग-अलग स्थितियां हैं। यदि फॉर्म में केवल दोषसिद्धि के संबंध में घोषणा मांगी गई थी, तो लंबित मामले का खुलासा नहीं करने को उसी आधार पर गलत घोषणा नहीं माना जा सकता। अदालत के फैसले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि पुलिस और अन्य सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में उम्मीदवारों से आपराधिक मामलों से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है। ऐसे मामलों में आवेदन फॉर्म में पूछे गए सवाल की वास्तविक भाषा और उम्मीदवार द्वारा की गई घोषणा का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा।