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कालकाजी मंदिर में महिला उत्तराधिकारियों को पूजा-सेवा का अधिकार, दिल्ली हाईकोर्ट ने पुरुष प्रतिनिधि नियुक्त करने की दी अनुमति
दिल्ली हाईकोर्ट ने कालकाजी मंदिर में पूजा-सेवा के अधिकार को लेकर चार महिला उत्तराधिकारियों को राहत दी है। अदालत ने उन्हें अपने परिवार के पुरुष प्रतिनिधियों के माध्यम से पूजा-सेवा करने की अनुमति देते हुए निर्देश दिया कि चढ़ावे और दान में उनके हिस्से की राशि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा की जाए।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कालकाजी मंदिर में पूजा-सेवा के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने चार महिला उत्तराधिकारियों को अपने परिवार के पुरुष प्रतिनिधियों के माध्यम से पूजा-सेवा करने की अनुमति दी है। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि पूजा-सेवा से प्राप्त चढ़ावे और दान में इन महिला उत्तराधिकारियों के हिस्से की राशि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा की जाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह ने 22 सितंबर 2026 को पारित किया। कालकाजी मंदिर से जुड़े पूजा-सेवा और उत्तराधिकार के अधिकारों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में लंबे समय से विभिन्न मामले विचाराधीन रहे हैं। अदालत पहले भी मंदिर के प्रशासन, पूजा-सेवा करने वाले पुजारियों और पारंपरिक अधिकार रखने वाले परिवारों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर चुकी है। वर्ष 2022 के एक मामले में भी कोर्ट के सामने यह सवाल आया था कि महिला उत्तराधिकारी अपने हिस्से की पूजा-सेवा स्वयं कर सकती हैं या किसी पुरुष प्रतिनिधि के माध्यम से यह अधिकार प्रयोग कर सकती हैं।
ताजा मामले में चार महिला उत्तराधिकारियों ने पूजा-सेवा से जुड़े अपने अधिकारों को लेकर अदालत का रुख किया था। अदालत ने उन्हें अपने परिवार के पुरुष प्रतिनिधियों को नियुक्त करके पूजा-सेवा करने की अनुमति दी। इसका अर्थ है कि महिला उत्तराधिकारी अपने अधिकार से वंचित नहीं होंगी, बल्कि उनके स्थान पर उनके परिवार का पुरुष सदस्य पूजा-सेवा की प्रक्रिया पूरी कर सकेगा। अदालत ने इस व्यवस्था के साथ आर्थिक हिस्सेदारी को भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। पूजा-सेवा के दौरान प्राप्त होने वाले चढ़ावे और दान में महिला उत्तराधिकारियों के हिस्से की राशि सीधे उनके पास देने के बजाय हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा की जाएगी। इससे संबंधित राशि अदालत की निगरानी में सुरक्षित रहेगी। कालकाजी मंदिर से जुड़े विवादों में पूजा-सेवा के पारंपरिक अधिकार, उत्तराधिकार और मंदिर के प्रशासन से जुड़े प्रश्न पहले भी अदालतों के सामने आते रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंदिर के बेहतर प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर भी कई निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने पूर्व में मंदिर के पुनर्विकास और प्रशासनिक व्यवस्था की निगरानी के लिए प्रशासक की नियुक्ति भी की थी। मंदिर से जुड़े पुराने न्यायिक रिकॉर्ड में यह भी सामने आया है कि पूजा-सेवा के अधिकार को लेकर महिला उत्तराधिकारियों के पुरुष प्रतिनिधियों के माध्यम से पूजा कराने का मुद्दा पहले अदालत के समक्ष उठ चुका है। एक मामले में ट्रायल कोर्ट ने महिला उत्तराधिकारी को उसके हिस्से के अनुसार पुरुष प्रतिनिधि के माध्यम से पूजा कराने का अधिकार दिया था, जिसे लेकर आगे अपील हुई थी। ताजा आदेश में हाईकोर्ट ने चार महिला उत्तराधिकारियों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए पुरुष प्रतिनिधियों के जरिए पूजा-सेवा की व्यवस्था को अनुमति दी है। साथ ही चढ़ावे और दान में उनके हिस्से की राशि को रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराने का निर्देश दिया है। इससे पूजा-सेवा के अधिकार और उससे जुड़े आर्थिक हित, दोनों को अदालत के आदेश के तहत सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है।
