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जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में मेंशन, तत्काल सुनवाई की मांग
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में मेंशन की गई। अधिवक्ता मैथ्यूज जे. नेदुमपारा ने CJI सूर्यकांत से मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की, हालांकि अदालत ने इस पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया।

नई दिल्ली।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास से कथित रूप से नकदी मिलने के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका बुधवार, 23 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मेंशन की गई। अधिवक्ता मैथ्यूज जे. नेदुमपारा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के समक्ष मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की। नेदुमपारा ने अदालत से कहा कि रजिस्ट्री मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर रही है। उन्होंने आग्रह किया कि अदालत मामले को खारिज करना चाहे तो कर सकती है, लेकिन कम से कम याचिका को नंबर देकर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। इस दौरान एक अन्य याचिकाकर्ता ने, जो स्वयं अदालत में पेश हुए, दावा किया कि लोकसभा जांच समिति द्वारा न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित माना गया है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी स्थिति में एफआईआर दर्ज करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने की शक्ति है और सभी मामलों में समान व्यवहार होना चाहिए। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले की सूचीबद्धता के संबंध में कोई स्पष्ट आदेश या टिप्पणी नहीं की।
यह मामला न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े कथित ‘कैश-एट-होम’ विवाद से संबंधित है। न्यायमूर्ति वर्मा दिल्ली और इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रहे हैं। उन्होंने अप्रैल 2026 में उस समय इस्तीफा दे दिया था, जब उनके खिलाफ लोकसभा में गठित जांच प्रक्रिया लंबित थी। न्यायाधीशों के खिलाफ जांच से संबंधित कानून के तहत गठित लोकसभा जांच समिति ने अगस्त 2026 में अपनी रिपोर्ट लोकसभा को सौंपी थी। रिपोर्ट में समिति ने न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित पाया था। हालांकि, जांच समिति की रिपोर्ट अपने आप में एफआईआर दर्ज होने या आपराधिक दोषसिद्धि के समान नहीं है और आपराधिक कार्रवाई का प्रश्न अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत तय होना है। इससे पहले पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली घनश्याम उपाध्याय की जनहित याचिका खारिज कर दी थी। वहीं, इसी सप्ताह दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग वाली एक अन्य याचिका भी खारिज कर दी थी। ऐसे में 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में की गई ताजा मेंशनिंग के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली नई याचिका को अदालत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करती है या नहीं। फिलहाल मुख्य न्यायाधीश की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट आदेश सामने नहीं आया है।
