law-order

10 साल की सजा के खिलाफ तरुण तेजपाल की सुप्रीम कोर्ट में अपील, गोवा सरकार ने उम्रकैद की मांग की; दोनों पक्षों को नोटिस

2013 के दुष्कर्म मामले में 10 साल की सजा के खिलाफ तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गोवा सरकार को नोटिस जारी किया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया था।

Sonali27 सित. 2026, 03:17 PM IST
खबर शेयर करें:
10 साल की सजा के खिलाफ तरुण तेजपाल की सुप्रीम कोर्ट में अपील, गोवा सरकार ने उम्रकैद की मांग की; दोनों पक्षों को नोटिस

नई दिल्ली। 

तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल की 10 साल की सजा के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गोवा सरकार को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने 24 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई की। तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें हाईकोर्ट ने 2013 के दुष्कर्म मामले में उन्हें बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए दोषी ठहराया था और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह ऐसा मामला है जिसमें हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलट दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले में अपील का अधिकार है और तेजपाल ने आत्मसमर्पण कर दिया है। पीठ द्वारा गोवा सरकार को नोटिस जारी करने पर सहमति जताने के बाद सिब्बल ने सजा पर रोक के आवेदन की सुनवाई के लिए निश्चित तारीख देने का अनुरोध किया। पीठ ने कहा कि इस पहलू पर विचार किया जाएगा। इससे पहले पिछले महीने न्यायमूर्ति अलोक अराधे ने तेजपाल को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने और 22 सितंबर से पहले आत्मसमर्पण प्रमाणपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी अपील पर मेरिट के आधार पर सुनवाई की जानी थी। इस मामले में गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। राज्य सरकार ने दोषसिद्धि को चुनौती दिए बिना सजा को बढ़ाकर आजीवन कारावास किए जाने की मांग की है।

हाईकोर्ट ने 2021 के बरी होने के फैसले को पलटा

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने 6 अगस्त को तरुण तेजपाल को 2013 के मामले में दोषी ठहराया था। पीठ में न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जामसांडेकर शामिल थे। हाईकोर्ट ने गोवा सेशन कोर्ट द्वारा 2021 में दिए गए बरी करने के फैसले को पलट दिया था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा पीड़िता के कथित घटना के बाद के व्यवहार के आधार पर उसके बयान पर संदेह करने की आलोचना की थी। कोर्ट ने कहा था कि दुष्कर्म पीड़िता के लिए किसी तरह के ‘परफेक्ट व्यवहार’ की कोई अवधारणा नहीं हो सकती और अलग-अलग महिलाएं आघात को अलग-अलग तरीके से संभालती हैं। हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा था कि घटना को करीब 13 वर्ष बीत चुके हैं और तेजपाल के खिलाफ इसके बाद किसी अन्य आपराधिक कदाचार की रिपोर्ट सामने नहीं आई। इसी आधार पर कोर्ट ने गोवा सरकार की ओर से मांगी गई आजीवन कारावास की अधिकतम सजा के बजाय दुष्कर्म के अपराध के लिए निर्धारित न्यूनतम सजा यानी 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

2013 में होटल की लिफ्ट में घटना का आरोप

मामला नवंबर 2013 का है। आरोप था कि गोवा में तहलका द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक लग्जरी होटल की लिफ्ट के अंदर तेजपाल ने अपनी एक कनिष्ठ महिला सहकर्मी का यौन उत्पीड़न किया था। गोवा सेशन कोर्ट ने 2021 में तेजपाल को बरी कर दिया था। इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए बरी किए जाने का फैसला पलट दिया और तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अब सुप्रीम कोर्ट में गोवा सरकार को नोटिस जारी होने के बाद मामले की आगे सुनवाई होगी। साथ ही तेजपाल की ओर से सजा पर रोक की मांग पर भी सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा।