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छात्रा की हथेली पर थपकी मारना महिला की लज्जा भंग का अपराध नहीं, केरल हाईकोर्ट ने शिक्षक के खिलाफ केस किया रद्द

केरल हाईकोर्ट ने एक पुरुष शिक्षक के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द करते हुए कहा कि कक्षा में अन्य छात्रों की मौजूदगी में छात्रा की हथेली पर मारना, बिना लज्जा भंग करने की मंशा के, IPC की धारा 354 के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि शिक्षक ने छात्रा को जगाने के लिए ऐसा किया था।

Sonali25 सित. 2026, 06:03 PM IST
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छात्रा की हथेली पर थपकी मारना महिला की लज्जा भंग का अपराध नहीं, केरल हाईकोर्ट ने शिक्षक के खिलाफ केस किया रद्द

केरल हाईकोर्ट ने एक पुरुष शिक्षक के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि कक्षा में अन्य छात्रों की मौजूदगी में महिला छात्रा की हथेली पर मारने की घटना, अपने आप में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत महिला की लज्जा भंग करने का अपराध नहीं बनती, जब आरोपी के कृत्य के पीछे ऐसी मंशा साबित न हो। न्यायमूर्ति जॉबिन सेबेस्टियन ने Raja Varier बनाम State of Kerala and Another मामले में यह आदेश पारित किया।  शिक्षक के खिलाफ IPC की धारा 354 और 354A के तहत आपराधिक कार्रवाई शुरू की गई थी।


क्या था मामला?

मामले के अनुसार, आरोपी शिक्षक ने अपनी महिला छात्रा की हथेली पर उस समय मारा था, जब वह कक्षा में थी। आरोप था कि शिक्षक के इस कृत्य से महिला की लज्जा भंग हुई और इसी आधार पर उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया। शिक्षक की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका में आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी गई। अदालत के समक्ष यह सवाल था कि क्या परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षक का कृत्य IPC की धारा 354 के तहत महिला की लज्जा भंग करने के अपराध के दायरे में आता है।


लज्जा भंग करने की मंशा जरूरी

न्यायमूर्ति जॉबिन सेबेस्टियन ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए कहा कि शिक्षक द्वारा छात्रा की हथेली पर मारने का उद्देश्य उसे जगाना था। अदालत के अनुसार, उपलब्ध तथ्यों से यह नहीं दिखता कि शिक्षक की ओर से छात्रा की लज्जा भंग करने की आवश्यक मंशा थी। कोर्ट ने विशेष रूप से इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि घटना कक्षा में हुई थी और वहां अन्य छात्र मौजूद थे। ऐसे में मामले के उपलब्ध तथ्यों से आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 354 के लिए आवश्यक आपराधिक इरादे को स्थापित नहीं किया जा सकता।


धारा 354 के तहत केवल शारीरिक संपर्क पर्याप्त नहीं

हाईकोर्ट ने इस मामले में यह स्पष्ट किया कि किसी महिला को छूना या उसके साथ शारीरिक संपर्क होना मात्र धारा 354 IPC के तहत अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। आरोपित कृत्य की प्रकृति और उसके पीछे आरोपी की मंशा भी महत्वपूर्ण होती है। अदालत ने पाया कि वर्तमान मामले में शिक्षक के कृत्य को महिला की लज्जा भंग करने की मंशा से जोड़ने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। इसलिए शिक्षक के खिलाफ जारी आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। अदालत ने इसके बाद शिक्षक के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि महिला की लज्जा भंग से संबंधित आपराधिक प्रावधानों को लागू करते समय केवल घटना के स्वरूप को नहीं, बल्कि आरोपी के कथित कृत्य के उद्देश्य और आवश्यक आपराधिक मंशा को भी देखा जाना आवश्यक है।