law-order
‘पैसे वसूलने का जरिया नहीं बन सकते कोर्ट’, वैवाहिक और कारोबारी FIR रद्द करने की याचिकाओं पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त
बॉम्बे हाईकोर्ट ने वैवाहिक और कारोबारी विवादों में FIR के जरिए पैसे की वसूली की कोशिश पर सख्त टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव ने कहा कि अदालतों को ‘रिकवरी मैकेनिज्म’ के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और आपराधिक कानून को सौदेबाजी या निजी हिसाब चुकाने के हथियार में नहीं बदला जाना चाहिए। कोर्ट ने ऐसे मामलों में आपसी सहमति से FIR रद्द करने पर लागत लगाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

मुंबई।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने वैवाहिक और कारोबारी विवादों से जुड़ी FIR को आपसी सहमति के आधार पर रद्द कराने की प्रवृत्ति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव ने कहा कि अदालतों का इस्तेमाल पैसे की वसूली के लिए ‘रिकवरी मैकेनिज्म’ के तौर पर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानून को व्यक्तिगत हिसाब चुकाने या पक्षों के बीच सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि जब पक्षकार आपसी सहमति से किसी वैवाहिक या कारोबारी विवाद को खत्म करने के बाद FIR रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट पहुंचते हैं, तो उचित मामलों में अदालतों को लागत लगाने पर विचार करना चाहिए। जस्टिस मिलिंद जाधव ने स्पष्ट किया कि आपराधिक कार्यवाही का उद्देश्य किसी पक्ष को उसके निजी या व्यावसायिक दावे की रकम वसूलने में सहायता करना नहीं है। यदि किसी विवाद में पैसे की देनदारी या अन्य कारोबारी दावा है, तो उसके समाधान के लिए कानून में उपलब्ध उचित सिविल या अन्य वैधानिक उपायों का सहारा लिया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि आपराधिक कानून को ‘बर्गेनिंग चिप’ यानी सौदेबाजी के साधन के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं है। विशेष रूप से ऐसे मामलों में जहां FIR दर्ज होने के बाद पक्षकार समझौता कर लेते हैं और फिर आपसी सहमति के आधार पर FIR रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख करते हैं, अदालत को कार्यवाही की प्रकृति और उसके दुरुपयोग की संभावना पर ध्यान देना चाहिए।
हाईकोर्ट की यह टिप्पणी वैवाहिक विवादों और वाणिज्यिक लेनदेन से जुड़े आपराधिक मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। कई मामलों में विवाद के दौरान आपराधिक शिकायत या FIR दर्ज होने के बाद दोनों पक्ष समझौते पर पहुंचते हैं। इसके बाद आरोपी पक्ष FIR रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट की अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करता है। अदालत ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का इस्तेमाल केवल आपसी समझौते को रिकॉर्ड करने या आर्थिक विवाद के निपटारे के लिए नहीं होना चाहिए। कोर्ट को यह भी देखना होगा कि आपराधिक कानून की प्रक्रिया का इस्तेमाल किसी पक्ष पर आर्थिक या अन्य दबाव बनाने के लिए तो नहीं किया गया। न्यायमूर्ति जाधव की टिप्पणी का मूल उद्देश्य आपराधिक न्याय व्यवस्था के दुरुपयोग को रोकने और अदालतों की प्रक्रिया को निजी वसूली के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किए जाने से बचाना है। अदालत ने कहा कि आपसी सहमति से FIR रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए। साथ ही, जहां उचित हो, वहां लागत लगाकर पक्षकारों को न्यायिक प्रक्रिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने का संदेश दिया जा सकता है। इस प्रकार बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक या कारोबारी विवाद में आपराधिक कानून को पैसे की वसूली, दबाव बनाने या सौदेबाजी के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने ऐसे मामलों में FIR रद्द करने की प्रक्रिया के दौरान लागत लगाने के पहलू को भी महत्वपूर्ण माना है।
